बैंक होल्डिंग कंपनी बनाएगी सरकार

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Feb 25, 2018 10:49 PM IST

योजना पर हो रहा विचार

► सभी सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को इसी कंपनी के तहत लाएगी सरकार
होल्डिंग कंपनी ही बैंकों के लिए शेयर विनिवेश या पूंजी जुटाने का करेगी काम
इस कंपनी को पेशेवर तरीके से चलाने की है तैयारी
इसके लिए सरकार को बैंक राष्ट्रीयकरण अधिनियम में करना होगा संशोधन
हालांकि सरकार ने इसके गठन के बारे में नहीं बताई कोई समयसीमा
होल्डिंग कंपनी का विचार वित्त मंत्री ने 2015-16 में दिया था

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी)-नीरव मोदी मामले में 11,400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आने के बाद सरकार बैंक होल्डिंग कंपनी बनाने की अपनी पुरानी योजना को अमलीजामा पहनाने पर विचार कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सरकार की सभी हिस्सेदारी इस कंपनी के तहत आएगी और उक्त कंपनी ही बैंकों के लिए पूंजी जुटाएगी। होल्डिंग कंपनी का विचार सबसे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2015-16 के बजट में दिया था। इसी कवायद के तहत फरवरी 2016 में विनोद राय के नेतृत्व में बैंक बोर्ड ब्यूरो का गठन किया गया था।

ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों के सदस्यों की संख्या राज्यसभा में अप्रैल में बढ़कर करीब 100 हो जाएगी लेकिन यह सदन के आधी संख्या बल 123 से कम ही होगी। हालांकि सरकार के नीति निर्माताओं को लगता है कि बैंक राष्ट्रीयकरण अधिनियम (बीएनए) में संशोधन को पारित करना संंभव होगा। बैंक होल्डिंग कंपनी बनाने के लिए ऐसे संशोधन को पारित कराना जरूरी होगा।

सरकार के एक अधिकारी ने कहा, 'पिछले कुछ साल से होल्डिंग कंपनी गठित करने पर काम किया जा रहा है। हालांकि राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं होने की वजह से कई अन्य महत्त्वपूर्ण विधेयकों और संशोधनों को पहले पारित करना जरूरी था। इनमें ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता, वस्तु एवं सेवा कर के लिए संविधान संशोधन, जीएसटी विधेयक आदि शामिल हैं।'

अधिकारी ने कहा, 'अप्रैल के बाद सरकार के पास बीएनए संशोधन को पारित कराने के अच्छे मौके होंगे, जिससे वह होल्डिंग कंपनी बनाने में सक्षम होगी।' हालांकि उक्त अधिकारी ने होल्डिंग कंपनी के ढांचे या कब तक उसका गठन किया जाएगा, इसके बारे में समयसीमा नहीं बताई। सरकार के अंदर माना जा रहा है कि इसे अर्ध-स्वायत्त होल्डिंग कंपनी के तौर पर बनाना चाहिए और परिचालन पेशेवर तरीके से हो। इस कंपनी में केंद्र सरकार की बहुलांश हिस्सेदारी होगी। इस कंपनी में सभी सूचीबद्ध सार्वजनिक बैंकों में सरकार की पूरी हिस्सेदारी होगी। सरकार के पास यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया की 87 फीसदी, यूनियन बैंक की 55.5 फीसदी, भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नैशनल बैंक की 57 फीसदी तथा बैंक ऑफ बड़ौदा की 59 फीसदी हिस्सेदारी है। इसके अलावा भी अन्य सरकारी बैंकों में सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है।

यह कंपनी जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक बैंकों की हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी और प्रावधान एवं विकास की जरूरतों के हिसाब से पुनर्पूंजीकरण का प्रबंध करेगी। अगर अभी इस तरह की होल्डिंग कंपनी होती तो वह 1.35 अरब रुपये के पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड जारी कर सकती थी। उक्त अधिकारी ने कहा, 'बैंक होल्डिंग कंपनी को निजी क्षेत्र सहित दक्ष बैंकरों द्वारा पेशेवर तरीके से चलाया जाना चाहिए  तथा अफरशाही या राजनीतिक नेेतृत्व का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।'

पीएनबी मामले और रोटोमैक पेन्स का मामला सामने आने के बाद सावर्जनिक बैंकों के निजीकरण करने की मांग बढ़ रही और बैंकों के एकीकरण एवं निजीकरण की दिशा में तेजी से आगे नहीं बढ़ाने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार  की आलोचना भी हो रही है। जेटली ने पिछले हफ्ते एक कार्यक्रम में कहा था कि सार्वजनिक बैंकों का निजीकरण चुनौतिपूर्ण निर्णय है और इसके लिए राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति बनानी होगी। हालांकि होल्डिंग कंपनी बनाने से बैंकों का सीधा निजीकरण नहीं होगा लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इससे सरकार को अपनी आलोचना से बचने का मौका मिलेगा।

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