भगोड़े आर्थिक अपराधियों के लिए अध्यादेश मुमकिन

अरूप रायचौधरी | नई दिल्ली Feb 28, 2018 09:06 PM IST

बजट सत्र के दूसरे हिस्से में अगर भगोड़े आर्थिक अपराधियों का विधेयक पारित नहीं होता है तो नरेंद्र मोदी सरकार इस विधेयक को मॉनसून सत्र से पहले अध्यादेश के तौर पर लागू कर सकती है। बजट सत्र का दूसरा हिस्सा 5 मार्च से शुरू हो रहा है और यह 6 अप्रैल तक चलेगा। अभी सरकार के एजेंडे में वित्त विधेयक 2018, राज्यसभा में अटका तीन तलाक बिल और पिछड़े वर्ग के राष्ट्रीय आयोग को संवैधानिक दर्जे के लिए संविधान संशोधन आदि शामिल है। सरकार के योजनकारों को पंजाब नैशनल बैंक के घोटाले और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ती चिदंबरम की सीबीआई जांच के चलते संसद की कार्यवाही बाधित होने का अंदेशा है।
 
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, आगामी बजट सत्र में भगोड़े आर्थिक अपराधियों के लिए विधेयक को संसद के पटल पर रखा जाएगा। हालांकि अगर यह सत्र के दौरान पारित नहीं होता है तो सरकार इस बाबत अध्यादेश ला सकती है। इसके बाद मॉनसून सत्र में इस अध्यादेश को कानून बनाया जाएगा। पीएनबी के 114 अरब रुपये के घोटाले के चलते सरकार भगोड़े आर्थिक अपराधियों के विधेयक के मसौदे पर तेजी से काम कर रही है। यह विधेयक जल्द ही कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा और फिर बजट सत्र के दूसरे हिस्से में इसे संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली बार इस बारे में 2017-18 के बजट में भाषण दिया था। कानून मंत्रालय की मंजूरी हासिल कर चुके मसौदा विधेयक के जरिए सरकार उन आर्थिक अपराधियों व डिफॉल्टरों की संपत्तियां जब्त कर सकेंगी, जो भारत से भाग गए हैं। अभी ऐसी जब्ती कई कानूनों के जरिए होती है, लेकिन यह प्रक्रिया जटिल है।
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