मुश्किल में हैं घोटाले से जुड़े कुछ शेयर

दीपक कोरगांवकर और पुनीत वाधवा | मुंबई/नई दिल्ली Feb 28, 2018 09:07 PM IST

पिछले दो दशकों में विभिन्न घोटालों, धोखाधड़ी आदि में शामिल रही कंपनियां अपने सर्वोच्च स्तर के मुकाबले बाजार कीमतों का 90 फीसदी से ज्यादा गंवा चुकी हैं। यह जानकारी आंकड़ों से मिली। 1998 से 2001 तक भारतीय शेयर बाजार में घोटाले में शामिल रहे पूर्व ब्रोकर केतन पारिख को साल 2008 में सजा सुनाई गई थी। केतन पारिख के शेयरों में शामिल (के-10) मसलन हिमाचल फ्यूचरिस्टिक कम्युनिकेशन (एचएफसीएल), जीटीएल और पेंटामीडिया ग्राफिक्स और मुक्ता आट्र्स, टिप्स इंडस्ट्रीज व प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशंस में इनका भारी निवेश था और अभी इन शेयरों का कारोबार साल 2000 के सर्वोच्च स्तर के मुकाबले 99 फीसदी से कम पर हो रहा है।

 
1998-2001 के दौरान पारिख ने कृत्रिम तरीके से चुनिंदा शेयरों (अनौपचारिक तौर पर इसे के-10 शेयर कहा जाता है) की कीमतों को मनमाने तरीके से आगे बढ़ाया और इसके लिए गुजरात के माधवपुरा मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक समेत विभिन्न बैंकों से बड़ी उधारी का इस्तेमाल किया। इस सहकारी बैंक में वह निदेशक थे। इसी तरह यूनिटेक और डीबी रियल्टी (जिनके प्रवर्तकों का नाम 2009 के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में था) के शेयर अपने सर्वोच्च स्तर से अपना बाजार मूल्यांकन 85 फीसदी से ज्यादा गंवा चुके हैं। ऐसा तब भी देखने को मिल रहा है जब सीबीआई की विशेष अदालत ने 2जी घोटाले के सभी आरोपियों को दिसंबर 2017 में दोषमुक्त करार दे दिया।
 
सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के बाद डीबी रियल्टी का शेयर 20 दिसंबर 2018 के 36.45 रुपये के मुकाबले 130 फीसदी चढ़कर 10 जनवरी 2018 को 83.80 रुपये पर पहुंच गया। अभी यह शेयर बीएसई पर 58.15 रुपये पर कारोबार कर रहा है। 31 मार्च 2010 को कारोबार के दौरान इसने 540 रुपये के सर्वोच्च स्तर को छू लिया था। इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, कोई घोटाला होने पर उसमें शामिल कंपनियों को लेकर निवेशकों का भरोसा हिल जाता है। इसके परिणामस्वरूप शेयर में गिरावट आती है। के-10 शेयरों की बात करें तो अब कंपनियों में कुछ नहीं बचा है। इनमें से ज्यादातर का फंडामेंटल कमजोर है और ये एक्सचेंज पर अपनी खोई गरिमा वापस पाने में अक्षम रही हैं।
 
सोमवार को ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) फिसलकर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर 92.50 रुपये पर आ गया क्योंकि खबरों में कहा गया था कि सीबीआई ने सरकारी बैंक की शिकायत पर दिल्ली के एक जौहरी के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जो 3.9 अरब रुपये के कर्ज घोटाले से जुड़ा है। गीतांजलि जेम्स और डी एस कुलकर्णी डेवलपर्स के निवेशकों भी अपनी कुल बाजार परिसंपत्तियों का 96 फीसदी गंवा चुके हैं। ये शेयर क्रमश: 24 अप्रैल 2013 व 8 दिसंबर 2006 को अपने सर्वोच्च स्तर 650 रुपये पर पहुंच गए थे।
 
गीतांजलि जेम्स के मामले में इसके प्रबंध निदेशक मेहुल चोकसी का नाम पंजाब नैशनल बैंक के 114 अरब रुपये के घोटाले में शामिल है। इस घोटाले के केंद्र में देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक पीएनबी है जिसका शेयर 14 फरवरी को घोटाला सार्वजनिक होने के बाद से अब तक 30 फीसदी टूट चुका है। चोकालिंगम ने कहा, पीएनबी के मामले में मौजूदा बकाया शुद्ध एनपीए इसकी वित्तीय हैसियत के करीब है। अभी तक 114 अरब रुपये का घोटाला सामने आया है। यह शेयर भाव पर दबाव बनाए रख सकता है। हम लंबी अवधि के लिहाज से पीएनबी का शेयर 110-110 रुपये के भाव पर खरीद सकते हैं। पुणे की डी एस कुलकर्णी डेवलपर्स का शेयर 15.75 रुपये के निचले स्तर को छू गया, जो 17 अप्रैल 2017 के 52 हफ्ते के उच्चस्तर 69.75 रुपये के मुकाबले 77 फीसदी नीचे है। इसके संस्थापक व चेयरमैन डी एस कुलकर्णी को हाल में गिरफ्तार किया गया था जब बंबई उच्च न्यायालय ने धोखाधड़ी मामले में इनकी अग्रिम जमानत तो आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। इस बीच, जेफरीज के विश्लेषकों ने पीएनबी में निवेश बनाए रखने की सलाह दी है और इसका कीमत लक्ष्य 110 रुपये रखा है।
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