भारतीय स्टेट बैंक ने बढ़ाईं जमा दरें

अनूप रॉय और अभिजित लेले | मुंबई Feb 28, 2018 09:44 PM IST

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने खुदरा सावधि जमा की दरें 10 से 50 आधार अंक बढ़ा दिया है। यह बढ़ोतरी अलग अलग जमा अवधि के मुताबिक अलग अलग है। स्टेट बैंक के इस कदम का बैंकिंग व्यवस्था में अनुसरण किया जा सकता है।  एक आधार अंक प्रतिशत अंक का सौवां हिस्सा होता है।  अपनी वेबसाइट पर की गई घोषणा में देश के सबसे बड़े बैंक ने कहा है कि 7 से 45 दिन के जमा पर सालाना ब्याज  5.75 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 5.25 प्रतिशत था।
 
 एक साल की जमा पर अब 6.40 प्रतिशत ब्याज मिलेगा जबकि इसके पहले 6.25 प्रतिशत था। वहीं दो साल से 10 साल की जमा पर ब्याज दर 6.50 प्रतिशत होगी, जो पहले 6.25 प्रतिशत थी। अब वरिष्ठ नागरिकों को 7 प्रतिशत ब्याज मिलेगा, जो पहले के 6.50 प्रतिशत से ज्यादा है। ये दरें बुधवार से लागू होंगी।  स्टेट बैंक ने अपनी अधिसूचना में कहा है, 'ब्याज की प्रस्तावित दरें ताजा जमा और जमा की गई राशि की मेच्योरिटी का नवीकरण कराने पर लागू होंगी।' स्टेट बैंक ने 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की बड़ी जमा पर भी ब्याज दरें 25 से 75 आधार अंक बढ़ाई हैं, जो मेच्योरिटी की अवधि के मुताबिक अलग अलग है। 
 
स्टेट बैंंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि व्यवस्था में नकदी की कमी हो रही है और बैंकों के पास दरें बढ़ाने के अलावा बहुत कम विकल्प है, जब धन आकर्षित करने के सभी विकल्प प्रतिस्पर्धा के शिकार हो गए हैं। कर्ज की मांग बढ़ रही है और वित्त वर्ष 2017-18 के अंतिम महीनों में गतिविधियां बढ़ी हैं।  30 जनवरी 2018 को देश के सबसे बड़े बैंक ने घरेलू थोक सावधि जमा पर ब्याज दरोंं में 75 से 140 आधार अंक की बढ़ोतरी की थी। यह बढ़ोतरी व्यवस्था में नकदी की कमी की वजह से की गई।  करीब 2 महीने की अवधि में भारी जमा पर स्टेट बैंंक ने दूसरी बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इसके पहले स्टेट बैंक ने नवंबर 2017 में बड़ी सावधि जमा में एक प्रतिशत (100 आधार अंक) की बढ़ोतरी की थी।
 
जमा दरों में बढ़ोतरी से सामान्यतया उधारी दरों में बढ़ोतरी होती है। इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था गति पकड़ रही है, भले ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने नीतिगत दरों में फरवरी में तीसरी बार कोई बदलाव नहीं किया।  रेटिंग एजेंसी इक्रा ने मौद्रिक नीति समीक्षा में के बाद एक नोट में कहा था कि अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में कम अवधि की दरें बढ़ेंगी और दरें 6 प्रतिशत की नीतिगत दर के करीब रहेंगी।  नकदी की अधिकता बने रहने पर रीपो  रेट की तुलना में मनी रेट कम बनी रहती हैं, जो वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही में और जनवरी 2018 में रोजाना का औसत क्रमश: 5.86 प्रतिशत और 5.89 प्रतिशत रहा।  बहरहाल अतिरिक्त नकदी की मात्रा कम करने के लिए अन्य कम अवधि की दरें बढ़ाई जाती हैं। 90 दिन के ट्रेजरी बिल की रोजाना औसत दरें दिसंबर 2017 के दूसरे पखवाड़े में बढ़कर 6.19 प्रतिशत हो गईं, जो सितंबर अक्टूबर 2017 में 6.08 प्रतिशत और नवंबर 2017 में 6.11 प्रतिशत थीं। 
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