विदेशी कारोबार करें एकीकृत

अरूप रायचौधरी और अभिजित लेले | नई दिल्ली/मुंबई Mar 01, 2018 09:50 PM IST

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में 12,700 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के मद्देनजर सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विदेश में अपने कारोबार को एकीकृत करने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि इन बैंकों की विदेशों में मौजूद कुछ शाखाएं बंद हो जाएंगी जबकि बाकी का विलय किया जाएगा।  पीएनबी के फर्जी गारंटी पत्रों (एलओयू) के आधार पर हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों ने भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से कर्ज लिया था।  वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव कुमार ने गुरुवार को ट्वीट किया कि सभी सरकारी बैंकों के विदेशों में स्थित 216 परिचालन के कामकाज की जांच की जाएगी। लागत घटाने और कामकाम में तालमेल के लिए विदेश में इन बैंकों के गैर व्यावहारिक कामकाज को बंद किया जाएगा। एक ही देश में स्थित विभिन्न परिचालन का एकीकरण किया जाएगा। 

 
कुमार ने कहा, 'सरकारी बैंक अपनी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी को प्रभावित किए बिना विदेश में मौजूद अपने 35 परिचालन का एकीकरण करेंगे। 69 परिचालनों की आगे और जांच की जाएगी। इस कदम का मकसद लागत कम करना और कामकाज में तालमेल कायम करना है।'  इस बीच भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष रजनीश कुमार ने दिल्ली में एक समारोह में कहा कि सभी सरकारों बैंकों के विदेशी कामकाज की समीक्षा करने के फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि बैंकों को विदेशी कारोबार के औचित्य पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से यह बात सरकार के एजेंडे में थी और पिछले साल नवंबर में वित्त मंत्रालय और सरकारी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों की दो दिवसीय बैठक पीएसबी मंथन में इस पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि देश का सबसे बड़ा बैंक विदेश में अपना कामकाज जारी रखेगा। एक सरकारी बैंक के वरिष्ठï अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि कारोबारी आकलन के आधार पर एकीकरण किया जाएगा और इसमें दूसरे भारतीय बैंक के साथ संपत्तियों और देनदारियों की अदला बदली, कुछ स्थानों में शाखाओं की जगह प्रतिनिधि कार्यालय बनाने और परिचालन के गैर व्यावहारिक होने की स्थिति में उन्हें बंद करने का भी विकल्प होगा।
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