धोखाधड़ी कर भागे तो संपत्ति होगी जब्त

वीणा मणि और अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Mar 01, 2018 09:51 PM IST

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में करीब 12,700 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आने के बाद सरकार गड़बड़ी करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंटों और भगोड़ों पर सख्ती करने की तैयारी कर रही है।  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आर्थिक अपराध कर फरार होने वालों से निपटने के लिए भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक को आज मंजूरी दी। इसके तहत धोखाधड़ी करने के बाद विशेष अदालत के सामने पेश नहीं होने या समन का तालीम नहीं करने वालों की संपत्तियां जब्त करने का प्रावधान है। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने कंपनी कानून के एक प्रावधान को भी मंजूरी दे दी जिसके तहत नैशनल फाइनैंशियल रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) का गठन किया जाएगा। यह निकाय देश के चार्टर्ड अकाउंटेंटों का विनियमन करेगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक को बजट सत्र में पेश कर सकती है, वहीं एनएफआरए को कंपनी कानून के तहत अधिसूचित किया जाएगा। भगोड़ा विधेयक के दायरे में वैसे आर्थिक अपराधी आएंगे जिनने 100 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जीवाड़ा किया हो। एनएफआरए सूचीबद्घ कंपनियों और गैर-सूचीबद्घ बड़ी कंपनियों के अकाउंटेंटों का नियमन करेगा। कंपनी मामलों का मंत्रालय इसकी परिभाषा तय करेगा कि कौन गैर-सूचीबद्घ बड़ी कंपनियां हैं। छोटी गैर-सूचीबद्घ कंपनियों के अकाउंटेंटों का नियमन भारतीय सनदी लेखा संस्थान (आईसीएआई) द्वारा किया जाएगा। जेटली ने कहा, 'ऐसा व्यक्ति जो विशेष अदालत के समक्ष पेश नहीं होगा या समन के बावजूद जवाब नहीं देगा उसे आर्थिक अपराधी करार दिया जाएगा।' 
 
उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों की सभी संपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा। जेटली ने कहा, 'ऐसे मामले में बेनामी संपत्तियां भी जब्त की जाएंगी। अगला कदम अंतरराष्ट्रीय सहयोग का होगा, जिससे आर्थिक अपराधी घोषित व्यक्तियों की विदेश की संपत्तियां भी जब्त की जा सकेगी। जिस भी देश में उक्त व्यक्ति की संपत्ति होगी, उसे जब्त करने के लिए संबंधित देश के सहयोग की जरूरत होगी। इसलिए हम इसकी समुचित व्यवस्था कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि ऐसा अपराधी भारत की किसी भी अदालत में दीवानी मामला दायर नहीं कर सकेगा। विधेयक के अनुसार विशेष अदालत को आर्थिक अपराधी घोषित करने का अधिकार होगा। जब्त की गई संपत्तियों के प्रबंधन और उसकी बिक्री करने के लिए प्रशासक की नियुक्ति की जाएगी। अगर विधेयक बजट सत्र में पारित नहीं हो सका तो सरकार की योजना मॉनसून सत्र से पहले अध्यादेश लाने की है। हालांकि जेटली ने कहा, 'हम कोशिश कर रहे हैं कि विधेयक बजट सत्र में ही पारित हो जाए।' इस विधेयक को जेटली ने 2017-18 के बजट में प्रस्तावित किया था। मौजूदा मामले भी प्रस्तावित कानून के दायरे में आ सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से संबंधित मामले भी इसके दायरे में आएंगे। विधेयक में जांच एजेंसियों को ज्यादा अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव है। इससे संपत्तियों की जब्ती में तेजी आएगी, जिससे पैसे की वसूली में मदद मिलेगी।एनएफआरए को जल्द अधिसूचित किया जाएगा। इसमें चेयरमैन और 15 सदस्य होंगे।
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