नीरव मोदी ने दिए, मेहुल चोकसी को मिले

श्रीमी चौधरी | मुंबई Mar 01, 2018 10:06 PM IST

127 अरब रुपये के पीएनबी घोटाले में 45 अरब रुपये मेहुल चोकसी की कंपनियों को भेजे गए थे। सीबीआई जांच में यह बात सामने आई है। प्रथम दृष्टïया साक्ष्य के मुताबिक यह लेनदेन मुखौटा कंपनियों के जरिये किया गया था। एक जांच अधिकारी ने कहा, 'हमें चोकसी और नीरव मोदी की कंपनियों के बीच वित्तीय लेनदेन और पैसा इधर से उधर भेजने का पता चला है।' अधिकारी ने कहा कि जांच अभी जारी है और सीबीआई को अभी नीरव के विदेशी कारोबार के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिली है जिससे पता लगाया जा सके कि पैसा कहां से कहां से गया। उन्होंने कहा कि जांच में जो बातें सामने आई हैं, उसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के साथ साझा किया गया है।
 
एक अन्य सूत्र के मुताबिक पीएनबी के फर्जी शपथ पत्रों (एलओयू) के माध्यम से हासिल की गई राशि विभिन्न बैंकों से होते हुए लाभार्थी तक पहुंची। कई परतों में लेनदेन किया और इसे फिर बांट दिया गया। लेकिन जांच एजेंसी इसके तह तक जाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि इस लेनदेन की कई परतें हैं और जिस तरह यह काम किया गया उससे साफ है कि चोकसी और मोदी अपने कारोबार संबंधी लेनदेन में मिलकर काम कर रहे थे। इनमें से अधिकांश लेनदेन संयुक्त अरब अमीरात और हॉन्गकॉन्ग में हुआ जबकि कुछ पैसा न्यूयॉर्क भी गया। सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि नीरव और चोकसी ने भारत और विदेशों में 120 से अधिक मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल किया और इस लेनदेन की जांच हो रही है। इन संदिग्ध मुखौटा कंपनियों की जांच में आयकर विभाग को शामिल किया गया है। 
 
ईडी के एक अधिकारी ने कहा कि सीबीआई से मिली जानकारी के आधार पर अब एजेंसी अपराध की आय की जांच करेगी और इस बात का पता लगाएगी कि क्या धन शोधन के लिए कई बार लेनदेन किया गया। ईडी के एक सूत्र ने कहा, 'हमने रिजर्व बैंक को कुछ लेनदेन की विशिष्टï लेनदेन संदर्भ संख्या लेने को कहा है। अभी तक इस संख्या को जांच एजेंसियों के साथ साझा करने का कोई प्रावधान नहीं है।' इन आंकड़ों से केंद्रीय एजेंसियों को रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) या नैशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) के रूप में लेनदेन की पहचान करने में मदद मिलेगी। अमूमन ये आंकड़े भेजने वाले और रिसीव करने वाले बैंकों के पास ही उपलब्ध रहते हैं। ये बैंक इस तरह के लेनदेन के बारे में मासिक आंकड़ें रिजर्व बैंक को भेजते हैं। सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसियों को ये आंकड़े मिलने के बाद वे इस मामले में शामिल लोगों की जमा राशि जब्त कर सकते हैं। 
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