वॉलेट के ग्राहकों में 40 फीसदी कमी के आसार

करण चौधरी | नई दिल्ली Mar 01, 2018 10:08 PM IST

मोबाइल वॉलेट कंपनियों ने 50 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों को अपने साथ जोडऩे के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं और अब उन्हें करीब 40 फीसदी ग्राहकों को खोने का डर सता रहा है। इसकी वजह यह है कि बुधवार यानी 28 फरवरी को नो योर कस्टमर (केवाईसी) पंजीकरण की समय-सीमा खत्म हो गई। उद्योग पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि मोबाइल वॉलेट कंपनियों मसलन पेटीएम, एमेजॉन पे, फोनपे और मोबिक्विक को अपने ग्राहकों का एक बड़ा हिस्सा खोने का डर सता रहा है। एमेजॉन पे जैसी कंपनी को अपने ग्राहकों में 30 फीसदी गिरावट देखनी पड़ी क्योंकि इनके मुताबिक इनके ग्राहकों ने अपना केवाईसी ब्योरा अपडेट नहीं किया। 
 
प्रीपेड पेमेंट इन्स्ट्रूमेंट (पीपीआई) का मकसद कम वैल्यू, कम जोखिम और ज्यादा ट्रांजेक्शन वाले लेन-देन का डिजिटलीकरण करना। भारतीय भुगतान परिषद (पीसीआई) के पीपीआई समिति के सह अध्यक्ष सुनील कुलकर्णी का कहना है, 'ग्राहक केवाईसी को लेकर सहज नहीं होते हैं और उन्हें डिजिटल लेन-देन के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। यह उद्योग इस दिशा में काम कर रहा है और साथ ही पीपीआई के लिए आरबीआई के दिशानिर्देशों का पालन भी कर रहा है। लेकिन केवाईसी नियमों को लेकर ग्राहकों का उत्साह नहीं दिख रहा है।' उनका कहना है, 'मोबाइल वॉलेट जारी करने वालों के लिए केवाईसी अनुपालन की जरूरतें ही ग्राहकों को पीपीआई के जरिये लेन-देन से रोक रही हैं।' मोबाइल वॉलेट उद्योग यूजरों को कैशबैक मुहैया करा रहा है ताकि डिजिटल लेन-देन की तरफ उनका रुझान बढ़े। 
 
पीपीआई समिति के सह अध्यक्ष श्रीराम जगन्नाथ कहते हैं, 'इसके जरिये ग्राहकों को अपने साथ जोडऩे की कवायद की जा रही है ताकि उनके नकदी के इस्तेमाल को मध्यम से दीर्घ अवधि में डिजिटल स्वरूप में बदला जाए। केवाईसी प्रक्रिया का अनुपालन करने के लिए हम सहज डिजिटल केवाईसी देने की कोशिश में है।' पेटीएम और मोबिक्विक जैसी कंपनियों ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।  कुलकर्णी का कहना है, 'शुरुआती नतीजों के आधार पर ज्यादातर कंपनियों के ग्राहकों में गिरावट देखी गई। हमने नए ग्राहक पंजीकरण में अच्छी-खासी कमी देखी है और हम आने वाले दिनों में और ज्यादा गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं। ग्राहक नकदी का विकल्प चुन सकते हैं क्योंकि अतिरिक्त ब्योरा दिए बगैर वे वॉलेट में पूंजी नहीं डाल पाएंगे।'
 
मोबाइल वॉलेट कंपनियां केवाईसी पूरा करने के लिए काफी निवेश कर रही हैं। पेटीएम जैसी कंपनियों ने केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने के लिए लगभग 50 करोड़ डॉलर अलग रखा है।  दि मोबाइल वॉलेट के संस्थापक और प्रबंध निदेशक विनय कलांत्री कहते हैं, 'भारतीय रिजर्व बैंक ने वॉलेट कंपनियों को निर्देश देने वाले परिपत्र में जो संशोधन किया है उससे केवाईसी अनुपालन मुश्किल हो गया है।'
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