5 बैंकों पर रिजर्व बैंक की नजर

अभिजित लेले | मुंबई Mar 04, 2018 10:06 PM IST

बैंकों की और बढ़ेगी मुश्किल

रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार, एनपीए बढऩे से ये बैंक आ सकते हैं पीसीए दायरे में
केनरा, यूनियन बैंक, पीएनबी, आंध्रा बैंक और पंजाब ऐंड सिंध बैंक इसमें शामिल
दिसंबर 2017 तक इन बैंकों का एनपीए 6 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया है
पीसीए के दायरे में आने वाले बैंकों पर ज्यादा कर्ज देने पर होगी बंदिश
इन बैंकों की पुनर्पूंजीकरण योजना पर भी पड़ सकता है असर
इन बैंकों को 15,700 करोड़ रुपये के एटी-1 बॉन्ड को समय से पहले लेना पड़ सकता है वापस

केनरा और यूनियन बैंक सहित सार्वजनिक क्षेत्र के पांच बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के त्वरित सुधार के कदम (पीसीए) योजना के दायरे में आ सकते हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार दिसंबर 2017 में इन बैंकों की सकल निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 6 फीसदी से अधिक हो गई हैं, जिससे इनका पीसीए के दायरे में आने का जोखिम बना हुआ है।

अगर बैंक नियामक आरबीआई इन बैंकों को पीसीए के तहत लाता है तो इन्हें टियर 1 पूंजी के तहत निवेशकों को जारी किए गए 15,700 करोड़ रुपये के एटी-1 बॉन्डों को वापस लेना पड़ सकता है। केनरा और यूनियन बैंक के अलावा इसमें आंध्रा बैंक, पंजाब नैशनल बैंक और पंजाब ऐंड सिंध बैंक शामिल हैं। बैंक को पीसीए में डालने के निर्णय से पहले आरबीआई बैंकों के पूंजी पर्याप्तता अनुपात, शुद्ध एनपीए और संपत्तियों पर रिटर्न का मूल्यांकन करता है। पीसीए के दायरे में आने वाले बैंक पर कर्ज देने पर बंदिश लग जाती है, जिससे उसकी लोन बुक का आकार कम हो जाता है। बैंक की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करने के मकसद से ऐसा किया जाता है।

पिछले तीन वर्षों में घाटा होने की वजह से 21 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से 11 को आरबीआई पीसीए के दायरे में ला चुका है। इनमें बैंक ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक प्रमुख हैं। पीसीए के दायरे में आने और केंद्र सरकार की ओर से सार्वजनिक बैंकों के पुनर्पूंजीकरण से बैंकों को एटी-1 बॉन्डों को पहले वापस लेना पड़ेगा। इन बैंकों ने करीब 21,900 करोड़ रुपये के एटी-1 बॉन्ड जारी किए हैं, जिन्हें अगले कुछ हफ्तों में वापस लिया जा सकता है।

पिछले चार साल के दौरान सार्वजनिक बैंकों ने टियर-1 पूंजी अनुपात में सुधार के लिए एटी-1 बॉन्डों के जरिये 60,385 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इन बॉन्डों को बढ़ते घाटे, बेसल-3 के तहत पूंजी की बढ़ती जरूरतों और सरकार द्वारा सीमित पूंजी निवेश की पृष्ठïभूमि में जारी किया गया था। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण से पहले बैंकों को पूंजी अनुपात, वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही में भारी घाटे और एटी-1 बॉन्ड को पहले वापस लेने से केंद्र सरकार की ओर से इन बैंकों में पूंजी निवेश पर आंशिक असर पड़ सकता है।

इक्रा ने कहा कि बैंक की ओर से एटी-1 बॉन्ड जारी करने से बैंक की जोखिम वाली परिसंपत्तियों के लिए उनका पूंजी अनुपात 0.7 से 2.0 फीसदी घट सकता है। इक्रा ने कहा कि समय से पहले एटी-1 बॉन्ड वापस लेने से बैंकों का टियर-1 पूंजी अनुपात कमजोर हो सकता है। वित्त वर्ष 2016 की तीसरी तिमाही से वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकृत कर पूर्व घाटा 92,000 करोड़ रुपये रहा है।

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