बैंकों के कर्ज आवंटन की धीमी पड़ी रफ्तार

अभिजित लेले | मुंबई Mar 09, 2018 10:05 PM IST

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में 12,700 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद खासकर सरकारी बैंक रक्षात्मक हो गए हैं जिससे साल के अंत में कंपनियों को कर्ज के वितरण पर बुरा असर पड़ रहा है। साथ ही दबाव वाली परिसंपत्तियों के पुनर्गठन के लिए नए ढांचे के प्रभाव के आकलन में भी समय लग रहा है।

 

एक प्रमुख सरकारी बैंक के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि अमूमन वित्त वर्ष के अंतिम महीने मार्च में कर्ज के वितरण की गतिविधियां जोरशोर से चलती हैं। लेकिन अधिकांश बैंकों खासकर सरकारी बैंक प्रबंधन के पास अभी बड़े कारोबार पर ध्यान देने का समय नहीं है। देश के बैंकिंग कारोबार में इन बैंकों की 70 फीसदी हिस्सेदारी है। इस समय बैंकों ध्यान दबाव वाली परिसंपत्तियों के पुनर्गठन के लिए रिजर्व बैंक के नए ढांचे के प्रभावों और पीएनबी की धोखाधड़ी के बाद उपजी स्थिति से निपटने में लगा है। इसलिए कारोबार बढ़ाने का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ा है। 

अधिकारी ने कहा कि साथ ही पीएनबी मामले के बाद ऑडिटर अब अनुपालन की जांच को लेकर ज्यादा सख्त हो गए हैं जिससे साल खत्म होने से पहले काम की गति प्रभावित हो रही है। पूरा बैंकिंग तंत्र इस समय अस्तव्यस्त है। भारतीय स्टेट बैंक के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि अधिकारी और नियामक पीएनबी धोखाधड़ी मामले को अच्छे ढंग से नहीं निपटा रहे हैं। इससे पूरे बैंकिंग तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और नकारात्मक धारणा बन रही है। अधिकारी ने कहा कि कतिपय कारणों से 3 साल तक उद्योग को कर्ज प्रभावित रहा। यह तिमाही बेहतर उम्मीद के साथ शुरू हुई थी और संयोगवश आर्थिक गतिविधि में भी सुधार आया था। लेकिन पीएनबी धोखाधड़ी के उजागर होने के बाद यह उत्साह ठंडा हो गया है। इससे मार्च तिमाही में कर्ज वितरण प्रभावित होगा। अलबत्ता उन्होंने साथ ही जोड़ा कि स्थापित कंपनियों और अच्छे रिकॉर्ड वाली कंपनियों को ऋण देने से इनकार नहीं किया जा रहा है।
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