पिछले वित्त वर्ष में पीएनबी ने गंवाए 2,800 करोड़ रुपये

रॉयटर्स | नई दिल्ली Mar 09, 2018 10:33 PM IST

पिछले वित्त वर्ष में विभिन्न घोटाले में पंजाब नैशनल बैंक ने 2,800 करोड़ रुपये यानी 43.1 करोड़ डॉलर गंवाए। सरकार ने आज यह जानकारी दी और इस तरह से सभी सरकारी बैंकों में घोटाले के जरिए इसे सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। इस आंकड़े में इस साल का 200 करोड़ रुपये का कथित घोटाला शामिल नहीं है।

 

देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक पीएनबी ने फरवरी में दो बड़े आभूषण कारोबारियों व उनकी कंपनियों पर आरोप लगाया था कि 2010 से 2017 के बीच इन्होंने बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत से विदेशी बैंकों से कर्ज हासिल कर लिए और इसके लिए फर्जी गारंटी का इस्तेमाल किया गया।

इसे भारत के इतिहास में सबसे बड़ा बैंक घोटाला माना जा रहा है, लेकिन वित्त मंत्रालय ने संसद में बताया कि घोटाला सामने आने से पहले सरकारी बैंकों ने 31 मार्च 2017 को समाप्त वर्ष में घोखाधड़ी के 2,718 मामलों में कुल 195.33 अरब रुपये गंवाए।

मंत्रालय ने कहा, 2016-17 में अकेले पीएनबी ने 158 मामले दर्ज किए। इस बारे में पीएनबी की टिप्पणी नहीं मिल पाई। मंत्रालय ने कहा, रकम के लिहाज से पीएनबी के बाद बैंक ऑफ इंडिया व भारतीय स्टेट बैंक का स्थान है जिन्होंने क्रमश: 27.7 अरब रुपये और 24.2 अरब रुपये गंवाए। 

मंत्रालय ने धोखाधड़ी की प्रकृति के बारे में विस्तार से नहीं बताया, लेकिन कहा कि बैंकों में इस तरह की बढ़ती घटनाओं को रोकने की खातिर कदम उठाए जाने की सलाह देने के लिए केंद्रीय बैंक ने हाल में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति धोखाधड़ी रोकने में ऑडिटरों की भूमिका पर भी नजर डालेगी।

रॉयटर्स ने पिछले महीने कहा था कि सरकारी बैंकों ने 31 मार्च 2017 को समाप्त वित्त वर्ष तक पिछले पांच वित्त वर्षों में कर्ज घोटाले के 8,670 मामले दर्ज किए हैं और इनके साथ कुल 612.6 अरब रुपये जुड़े हुए हैं। भारत में कर्ज घोटाले का अर्थ मोटे तौर पर यह है कि उधार लेने वाला जानबूझकर कर्ज नहीं लौटाने की कोशिश करता है और अंतत: कर्ज का भुगतान नहीं करता है।

वित्त पर संसदीय समिति ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा कि पीएनबी में सामने आए घोटाले को लेकर वह काफी चिंतित है, जो स्पष्ट तौर पर बताता है कि नियमों, दिशानिर्देशों, नियंत्रण व संतुलन के बावजूद व्यक्तियों का छोटा समूह बैंक के साथ धोखाधड़ी कर सकता है।
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