उषा मार्टिन के ऋण पर ईडी, एसएफआईओ की नजर

शुभमय भट्टाचार्य | नई दिल्ली Mar 12, 2018 10:47 PM IST

भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में लेनदारों का ऊषा मार्टिन समूह पर 54 अरब रुपये का बकाया अब जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) दोनों की जांच के दायरे में है। एसएफआईओ ने कंपनी रजिस्ट्रार से इस बाबत एक रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए कहा है जबकि ईडी प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर इस मामले की जांच करेगा।

 

हालांकि इस विवाद से जुड़े किसी भी पक्ष ने मामले की पुष्टिï नहीं की है जो जांच एजेंसियों के लिए एक वाणिज्यिक विवाद के बजाय उद्योग जगत का एक अन्य दबावग्रस्त ऋण दिख रहा है। उल्लेखनीय है कि एसबीआई कंसोर्टियम ने फिलहाल उषा मार्टिन समूह के ऋण बकाये को गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की श्रेणी में नहीं रखा है। कंपनी के चेयरमैन राजीव झावर ने का कहना है कि कंपनी का ऋण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी समस्याओं से उबर रही थी।

 

इसी साल फरवरी में कंपनी ने वाह्यï वाणिज्यिक उधारी के जरिये बैंक के 1 अरब रुपये के बकाये का निपटान किया है। महज एक महीना पहले इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च ने कंपनी के ऋण प्रोफाइल को डाउनग्रेड कर दिया था। उषा मार्टिन की दीर्घकालिक जारीकर्ता रेटिंग फिसलकर 'आईएनडी बीबी प्लस' रह गई और कंपनी को 'रेटिंग वाच निगेटिव' करार दिया गया है।

हालांकि इससे पता चलता है कि भारतीय बैंक दबावग्रस्त ऋण अथवा एनपीए को शुरुआती चरण में क्यों नजरअंदाज कर देते हैं और जांच-पड़ताल नहीं करते हैं। जबकि ऐसे मामलों में कंपनी के प्रवर्तक अपनी जिम्मेदारियों को निभाने से बचते हैं।

हालांकि इस कंपनी के बारे में खबरों के शीर्षक से जाहिर तौर पर दो परिवारों के बीच पुराना पारिवारिक विवाद का पता चलता है। ब्रिज झावर और उनके बेटे एवं वर्तमान चेयरमैन राजीव का विरोध बसंत झावर और उनके बेटे प्रशांत झावर कर रहे हैं। समूह की प्रमुख कंपनी उषा मार्टिन में दोनों गुटों की 25.5 फीसदी की बराबर हिस्सेदारी है। समूह की अन्य कंपनियों में उषा मार्टिन एजुकेशन ऐंड सॉल्यूशंस लिमिटेड, उषा ब्रेको, उषाकॉम, प्रभात खबर आदि शामिल हैं। 

ऐसे में जिज्ञासा होना स्वाभाविक है कि बैंकिंग क्षेत्र किस प्रकार इन दो विरोधी खेमों के बीच फंस गया जो अब जांच एजेंसियों की निगरानी के दायरे में हैं। अप्रैल 2017 में प्रशांत झावर ने चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था और राजीव झावर चेयरमैन बने थी। उसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद काफी गहरा गया था। प्रशांत के पिता बसंत ने राजीव झावर पर धनशोधन आदि तमाम आरोप लगाए थे जिनका उन्होंने खंडन किया था।

दोनों पक्षों के बीच विवाद गहराने के कारण दिसंबर 2017 में समाप्त तिमाही के दौरान कंपनी का घाटा काफी बढ़ गया और उसने 43.75 अरब रुपये के कुल सालाना कारोबार पर 1.16 अरब रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। साल दर साल उसका घाटा बढ़ता गया और 2016-17 की तीसरी तिमाही में यह 1.09 अरब रुपये रहा था। इससे नकदी प्रवाह के मोर्चे पर कंपनी स्थिति कहीं अधिक खराब हो गई और ताजा ऋण जुटाने की उसकी क्षमता में तेज गिरावट दर्ज की गई। 

यही कारण है कि एसबीआई के एक आंतरिक नोट में इस ऋण को 2017-18 में खुद एस4ए (दबावग्रस्त परिसंपत्तियों के स्थायी पुनर्गठन के लि योजना) बास्केट में डालने पर गौर किया था। लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। राजीव झावर लगातार कहते रहे हैं कि इस्पात क्षेत्र में सुधार के साथ्थ ही वह सुधार की राह पर अग्रसर हैं। हालांकि आंकड़े काफी निराशाजनक दिख रहे हैं। मार्च 2014 में कंपनी का शुद्ध ऋण बनाम एबिटा अनुपात 5:1 से बढ़कर मार्च 2017 में 9.5:1 अनुपात हो गया।चेयरमैन के अनुसार, कंपनी की नकदी की स्थिति फिलहाल काफी खस्ताहाल हो चुकी है।
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