'केंद्र-राज्य में समन्वय से होगा फंसे कर्ज का समाधान'

ईशिता आयान दत्त और नम्रता आचार्य |  Mar 12, 2018 10:51 PM IST

बैंक अब बड़ी कंपनियों को उधारी देने से हिचक रहे हैं। ऐसे में आपके कॉरपोरेट ऋण बहीखाते की क्या स्थिति है?
हम हरेक तिमाही में बढ़त देख रहे हैं। लेकिन हमारी सीमा कुछ क्षेत्रों में उपकरण वित्त पोषण तक सीमित है जिनमें विनिर्माण, खनन, स्वास्थ्य सेवा, आईटी और कृषि शामिल हैं। उपकरण वित्त पोषण एवं बुनियादी ढांचे में इतनी अधिक संभावनाएं मौजूद हैं कि हम अपने कारोबार का विविधीकरण नहीं कर रहे हैं। बुनियादी ढांचा एक ऐसा क्षेत्र है जहां आपको कारोबार को समझना होता है। सौभाग्य से हम न केवल कंपनियों के बहीखाते को बल्कि अपने निवेश के कारण परिचालन संबंधी समस्याओं को भी समझते हैं।

ऋणग्रस्त बिजली परिसंपत्तियों के बारे में आपका आकलन, खासकर मूल्यांकन के संदर्भ में?
यह क्षेत्र एक कठिन परिस्थति से गुजर रहा है। ऐसे में सरकार को एक रणनीतिक नजरिया अपनाने की जरूरत है। यह क्षेत्र ईंधन के लिए केंद्र पर निर्भर है। वे राज्य सरकारों पर निर्भर हैं क्योंकि अंतत: डिस्कॉम पर उन्हीं का स्वामित्व है। इसलिए जब तक स्पष्टï रणनीति में सामंजस्य नहीं होगा, तब तक मुझे नहीं लगता कि इस क्षेत्र में सुधार संभव हो पाएगा। इस क्षेत्र में हमारे करीब 5,000 अरब रुपये के डूबते ऋण हैं।

क्या ऋणग्रस्त बिजली परिसंपत्तियों में आपकी दिलचस्पी होगी?
इंडिया पावर उन संयंत्रों के लिए बोली लगाने जा रही है जो ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत समाधान प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। उसके पास फिलहाल 1,500 मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता मौजूद है। यह एक अच्छा अवसर है।

क्या इस्पात की समस्या को आईबीसी के जरिये निपटाया जा रहा है?
इस्पात की समस्या को निपटाया जा रहा है क्योंकि कीमतों में अब तेजी दिखने लगी है। यही कारण है कि आप खरीदारों को तलाश रहे हैं। बिजली क्षेत्र की समस्या को भी निपटाने की जरूरत है क्योंकि यदि 5,000 अरब रुपये की परिसंपत्ति सुचारू हो जाएगी तो फिर ताजा पूंजी निवेश की कोई जरूरत नहीं होगी।

तमाम पक्ष अब अदालत का रुख कर रहे हैं। इसका क्या असर होगा?
यदि कोई कंपनी आईबीसी का रुख कर रही है और समाधान योजना को लेनदारों की समिति द्वारा 51 फीसदी मतदान के साथ मंजूरी दी जाती है तो आदेश जारी किया जाना चाहिए और समाधान योजना को तत्काल मंजूरी दी जानी चाहिए। कंपनियों को नकदी प्रवाह में धकेलने से सबसे अधिक नुकसान अर्थव्यवस्था को होगा। हमारे देश में पूंजी की किल्लत है। वर्तमान परिदृश्य में एक परियोजना स्थापित करने में 5 से 10 वर्ष लग जाएंगे। इसलिए नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और सीओसी की यह बुनियादी जिम्मेदारी है कि वे समाधान योजना को स्वीकार करें।
कीवर्ड बैंक, विनिर्माण, खनन, स्वास्थ्य सेवा, आईटी, कृषि,

  
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