'तेजी से बदला बचत का तरीका'

अनूप रॉय | मुंबई Mar 12, 2018 10:58 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक के भारतीय परिवारों की वित्तीय संपत्ति के तरीकों पर पहले तिमाही प्रकाशन से पता चलता है कि नोटबंदी के बाद वित्तीय लेन देन के व्यवहार में आए बदलाव को बहुत तेजी से पहले जैसा करने में सफल रहे। यह अध्ययन अब तक सालना प्रकाशित होता था, लेकिन अब यह हर तिमाही उपलब्ध होगा। सालाना अध्ययन में अक्सर परिवारों द्वारा निवेश व बचत के तरीकों में तेज बदलाव शामिल नहीं हो पाता, जो हर तिमाही में होता रहता है। 

 

द्विवर्षीय वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के लिए अध्ययन में परिवारों की बचत महत्त्वपूर्ण घटक है, जिससे वृहद आर्थिक और चरणबद्ध जोखिम के बारे में जानकारी मिलती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय परिवारों की वित्तीय परिसंपत्ति मुख्य रूप से बैंक जमा  होती है, उसके बाद जीवन बीमा का स्थान आता है। नोटबंकी के समय यह बाधित हो गया था, लेकिन नए नोट की आपूर्ति होते ही अगली ही तिमाही में स्थिति पहले जैसी हो गई।  

अध्ययन में कहा गया है, 'भारतीय परिवार शुद्ध रूप से बचत करने वाले और शेष अर्थवव्यवस्था को वित्तीय संसाधन की आपूर्ति करने वाले हैं।' इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही में परिवारों की शुद्ध वित्तीय परिसंपत्ति नकारात्मक (सकल घलेरू उत्पाद का -7.3 प्रतिशत) हो गई थी। बहरहाल धीरे धीरे मुद्रा की आपूर्ति होने के साथ भारतीय परिवारोंं की शुद्ध वित्तीय परिसंपत्ति चौथी तिमाही में पहले जैसी, तिमाही जीडीपी का 14.8 प्रतिशत हो गई जो पहली तिमाही के 5.8 प्रतिशत से ज्यादा है।
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