बंधन बैंक का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम लंबी अवधि के निवेश के लिए ही है सही

श्रीपाद एस ऑटे | मुंबई Mar 13, 2018 11:16 PM IST

बंधन बैंक का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम

आरंभिक सार्वजनिक निर्गम पेश करने जा रहे बंधन बैंक का परिदृश्य मजबूत है। इसकी संपत्ति की गुणवत्ता, उच्च लाभप्रदता और बढ़त की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। हालांकि ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि अल्पावधि के लिहाज से इसमें ज्यादा बढ़त की गुंजाइश नहीं है। 

साल 2001 में माइक्रोफाइनैंस कंपनी के तौर पर शुरुआत करने वाले कोलकाता के बंधन बैंक को साल 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक से बैंकिंग लाइसेंस मिला। आईपीओ के जरिए इसका इरादा 36.62 अरब रुपये जुटाने का है, जिसमें नए शेयर भी जारी होंगे। मौजूदा शेयरधारक मसलन आईएफसी इस पेशकश में 8.11 अरब रुपये में से एक हिस्सा बेचने जा रही है।

इस पेशकश से बैंक को आरबीआई की लाइसेंसिंग अनिवार्यता को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिसमें कहा गया है कि नया लाइसेंस पाने वाले बैंक को परिचालन शुरू करने के तीन साल के भीतर सूचीबद्ध होना पड़ेगा। ताजा पूंजी निवेश बैंक को अपनी बढ़त की रफ्तार बनाए रखने में सक्षम बनाएगा। इसका ज्यादातर इस्तेमाल उधारी में हो सकता है क्योंकि शाखाओं में निवेश पहले ही हो चुका है। 

बैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी सुनील समदानी ने कहा, शाखा नेटवर्क के विस्तार पर हम ज्यादातर निवेश कर चुके हैं। आने वाले समय में शाखा नेटवर्क के विस्तार की रफ्तार काफी कम रहेगी क्योंकि अभी पर्याप्त नेटवर्क विस्तार हो चुका है। दिसंबर 2017 के आखिर में लेनदार की शाखाओं की संख्या 887 थी जबकि इसके 430 एटीएम थे। बंधन बैंक का लोनबुक पिछले 17 साल (बैंक के तौर पर 2 साल के परिचालन समेत) में करीब 51 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि की रफ्तार से बढ़ा है, जो धीमा तो हुआ है, लेकिन अभी भी मजबूत है और 31 दिसंबर 2017 को 33 फीसदी रह गया है। 

निकट भविष्य में यह प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है। बंधन बैंक के संस्थापक, प्रबंध निदेशक और सीईओ चंद्र शेखर घोष ने कहा, जीएसटी लागू होने के चलते इन 17 सालों में मौजूदा साल बैंक के लिए सबसे कठिन रहा। इसके बावजूद हम कर्ज में 33 फीसदी की बढ़ोतरी हासिल कर पाए। अगले दो-तीन सालों में उधारी में 33 से 35 फीसदी की बढ़ोतरी आसानी से हासिल हो सकती है। बंधन बैंक की संपत्ति गुणवत्ता व लाभप्रदता का मजबूत रिकॉर्ड है।

मूल्यांकन की चिंता

विगत का प्रदर्शन और भविष्य की कारोबारी क्षमता प्रभावशाली है। हालांकि विश्लेषक इसकी छोटी-छोटी उधारी वाले कारोबारी मॉडल और स्थापित निजी क्षेत्र के बैंकों के मुकाबले उच्च मूल्यांकन को लेकर संशय जता रहे हैं, जो ज्यादातर सुरक्षित आधार पर उधार देता है, अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड है। 

एसबीआईकैप सिक्योरिटीज के सहायक उपाध्यक्ष (खुदरा शोध) राजेश गुप्ता ने कहा, कारोबारी क्षमता काफी मजबूत है। लेकिन इसका 96 फीसदी लोनबुक असुरक्षित है। हालांकि अपने आईपीओ पर यह प्राइस-टु-बुक वैल्यू के 4.6 गुने की मांग कर रहा है, जो निजी क्षेत्र के मजबूत बैंक मसलन एचडीएफसी बैंक के समान है, जिनका 80-90 फीसदी लोनबुक सुरक्षित है। 

ऐसे में बंधन बैंक का उच्च मूल्यांकन अनुचित है। ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशक ही इस आईपीओ में निवेश कर सकते हैं। बैंक का रिटर्न ऑन इक्विटी भी दबाव में आ सकता है। शेयर बिक्री के बाद प्रवर्तक की हिस्सेदारी करीब 82 फीसदी होगी, ऐसे में बैंक प्रवर्तक की हिस्सेदारी तीन साल के भीतर घटाकर 40 फीसदी पर लाने के आरबीआई के दिशानिर्देश के अनुपालन के लिए संघर्ष कर सकता है। बैंक इसमें छूट के लिए नियामक से संपर्क कर सकता है, पर रिटर्न ऑन इक्विटी पर तत्काल दबाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जब नए शेयर इस नियम के अनुपालन के लिए ही जारी किए जा रहे हैं।

एक अग्रणी ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा, कम लागत वाले चालू व बचत खाते की हिस्सेदारी बढ़कर 33.2 फीसदी पर पहुंचने के बावजूद इसका शुद्ध ब्याज मार्जिन कम हुआ है। कुछ अन्य विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि के लिहाज से आईपीओ ठीक नजर आ रहा है, लेकिन प्रमुख चिंता इसके महंगे मूल्यांकन को लेकर है।
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