गारंटी पत्र पर आरबीआई की रोक

अनूप रॉय | मुंबई Mar 13, 2018 10:46 PM IST

नीरव ने गारंटी पत्रों से ही किया था फर्जीवाड़ा

पीएनबी में 11,400 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद आरबीआई ने उठाया कदम
आयातकों को विदेश में भुगतान के  लिए बैंकों की ओर से जारी किया जाता है गारंटी पत्र
हालांकि निश्चित शर्तों को पूरा करने पर जारी किए जा सकते हैं साख पत्र

नीरव मोदी फर्जीवाड़े के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आयातकों को दिए जाने वाले गारंटी पत्र (एलओयू) और सुविधा पत्र (एलसीयू) जारी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आज निर्णय किया। हालांकि निश्चित शर्तों को पूरा करने के लिए साख पत्र एवं गारंटी पहले की तरह जारी किए जा सकते हैं। इससे सामान्य व्यापार उधारी में किसी तरह की समस्या नहीं आएगी। पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में 11,400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद बैंकों ने पहले ही एलओयू जारी करना कम कर दिया है। 

ये सभी जरूरी गारंटी हैं लेकिन इसके लिए प्रावधान जरूरतों में थोड़ा अंतर है। सुविधा पत्र एक बैंक के द्वारा दूसरे बैंक को जारी किया जाता है, जिसमें लेनदेन करने वाली फर्म की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होने को प्रमाणित किया जाता है। गारंटी पत्र के मामले में सीधे तौर पर इसकी गारंटी दी जाती है कि अगर संबंधित पक्ष भुगतान नहीं करता है तो एलओयू जारी करने वाला बैंक उसका भुगतान करेगा।

दूसरी ओर, साख पत्र दस्तावेज आदि के आधार पर बैंक तब जारी करते हैं, जब उन्हें लेनदेन की वास्तविकता  का भरोसा होता है। एलओयू और एलओसी के मामले में बैंक व्यापार या संबंधित पक्ष की वास्तविकता के आधार पर जारी करते हैं जबकि साख पत्र लेनदेन होने के दस्तावेज लेकिन भुगतान नहीं होने की स्थिति में दस्तावेज के आधार पर दिया जाता है। बैंक गारंटी एक तरह का वायदा होता है कि अगर संबंधित पक्ष भुगतान में चूक करता है तो उसे जारी करने वाला बैंक कसान की भरपाई करेगा।

नीरव मोदी घोटाले में पीएनबी के कुछ कर्मचारियों ने बैंक के कोर सिस्टम को धता बताते हुए एलओयू जारी किए थे। शुरुआत में कहा गया था कि यह घोटाला 11,400 करोड़ रुपये का है लेकिन जांच के बाद इस राशि को बढ़ाकर 12,700 करोड़ रुपये कर दिया गया था।

रिजर्व बैंक ने सोमवार को गारंटी और वैकल्पिक साख पत्र की अवधि 3 साल से घटाकर एक साल कर दी थी और बैंकों से कहा था कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके ग्राहक केवल विशेष उद्देश्य के लिए इनका उपयोग करें। साथ ही केंद्रीय बैंक ने जिंसों के जोखिम को हेज करने संबंधी दिशानिर्देशों में भी बदलाव किए थे लेकिन सोना, रत्न और हीरे जवाहरात का कारोबार करने वाली कंपनियों को यह सुविधा नहीं दी।

रिजर्व बैंक ने साख पत्र और गारंटी पत्र की अनुमति दी है लेकिन दिशानिर्देशों में कहा गया है कि बैंकों को बगैर जमानत के बहुत ज्यादा पैसा नहीं देना चाहिए। साख पत्र को क्रम संख्या वाले प्रतिभूति फॉर्म के रूप में जारी किया जाता है और इसमें लाभार्थी के लिए एक नियम है कि उन्हें अपने हितों को देखते हुए जारी करने वाले बैंक से गारंटी की असलियत का पता लगाना चाहिए।

बैंक गारंटी के लिए भी सख्त कायदे हैं। जैसे 50,000 रुपये और उससे अधिक की गारंटी पर दो अधिकारियों के हस्ताक्षर होने चाहिए। बैंकों की कुछ शाखाएं कट ऑफ सीमा के निचले हिस्से का अनुपालन करती हैं।
कीवर्ड नीरव मोदी, गारंटी पत्र, फर्जीवाड़ा, पीएनबी, आरबीआई, एलओयू, एलसीयू,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक