सीबीआई करेगा एलओयू की अवधि की जांच

सोमेश झा | नई दिल्ली Mar 15, 2018 10:22 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने हालांकि आयातकों के लिए बैंकों की तरफ से लेटर ऑफ अंडटेकिंग जारी करने पर पाबंदी लगा दी है, लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो पंजाब नैशनल बैंक की तरफ से 129 अरब रुपये के घोटाले में जारी ऐसी गारंटी की वैधता तय करने को लेकर असमंजस में है। यह घोटाला कथित तौर पर नीरव मोदी व मेहुल चोकसी समूह की कंपनियों की तरफ से हुआ है।

 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा सांसद की तरफ से पूछे गए सवाल का स्पष्ट तरीके से जवाब नहीं दे पाए कि क्या रत्न व आभूषण उद्योग को जारी एलओयू की अवधि 90 दिन या 364 दिन के लिए वैध है, जिसे एलओयू पर जारी आरबीआई के दिशानिर्देश में बैंकरों को यह ठीक नहीं लग रहा है।

जेटली ने 9 मार्च को लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा था, 'वाह्य वाणिज्यिक उधारी पर आरबीआई के निर्देश के मुताबिक, ट्रेड क्रेडिट, उधारी और अधिकृत डीलरों के जरिए विदेशी मुद्रा में उधारी के मामले में गैर-पूंजीगत सामान के ट्रेड क्रेडिट की परिपक्वता अवधि शिपमेंट की तिथि अथवा परिचालन चक्र से एक वर्ष तक होगी।' आभूषण, कीमती धातु अथवा हीरे या अन्य पत्थरों के साथ किसी भी रूप में सोने के आयात के लिए वस्तु एवं सेवा आयात पर आरबीआई के मास्टर निर्देश में वित्त मंत्री ने कहा है कि एलओयू की वैधता अवधि शिपमेंट की तिथि से अधिकतम 90 दिनों की होनी चाहिए। उन्होंने था कि प्लैटिनम, तराशे गए हीरे और कीमती पत्थरों के लिए साख पत्र की अवधि 90 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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