पीएनबी धोखाधड़ी के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कार्यशाला में जोखिम प्रबंधन मजबूत करने की कवायद

सोमेश झा | नई दिल्ली Mar 15, 2018 10:48 PM IST

बैंकों का ऋण दस्तावेज और मानक होंगे समान

बैंक आईटी प्रणाली की निगरानी के लिए ऑनसाइट साइबर सिक्योरिटी केंद्र बनाएंगे
250 करोड़ रुपये से अधिक कर्ज लेने वालों को विभिन्न बैंकों से कर्ज की सुविधा के लिए किया जाएगा हतोत्साहित
सभी स्विफ्ट संदेशों की मंजूरी के लिए अतिरिक्त चरण लागू किया जाएगा
प्रवर्तकों को अग्रिम इक्विटी लाने को कहा जाएगा और इक्विटी की गुणवत्ता का मूल्यांकन नुकसान सहन करने की क्षमता पर किया जाएगा
स्विफ्ट को 30 अप्रैल तक कोर बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जाएगा

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) के साथ धोखाधड़ी के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक जोखिम प्रबंधन को दुरुस्त करने की कवायद में जुटा गए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अब 250 करोड़ रुपये से अधिक कर्ज वाली कंपनियों को कई बैंकों से कर्ज की सुविधा के लिए हतोत्साहित करेंगे और बेहतर निगरानी के लिए सभी कर्जों  को बैंकों के कंसोर्टियम के तहत लाया जाएगा।

गुरुवार को बैंकों की बैठक में भारतीय स्टेट बैंक के उप प्रबंध निदेशक एवं मुख्य जोखिम अधिकारी डॉ. एम एस शास्त्री ने कहा, 'विविध बैंकिंग व्यवस्था की स्थिति में समरूपता नहीं होती है। ऐसे में 250 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज को बैंकों के कंसोर्टियम द्वारा देने पर जोर दिया जाएगा।'  

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सभी मुख्य तकनीकी अधिकारी, मुख्य जोखिम अधिकारी और कार्यकारी निदेशक जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने की रूपरेखा तय करने के लिए नई दिल्ली में आयोजित 12 से 14 मार्च तक चलने वाले तीन दिवसीय कार्यशाला में मौजूद थे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को इस प्रारूप की मंजूरी संबंधित बैंक के निदेशक मंडल से लेनी होगी। इसके बाद तीन से छह महीने में इन उपायों को लागू किया जाएगा। 

पंजाब नैशनल बैंक में करीब 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बाद वित्तीय सेवा विभाग द्वारा बैंकों को जोखिम प्रबंधन को मजबूत बनाने के बारे में रिपोर्ट मांगे जाने के बाद इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। शास्त्री ने कहा कि 250 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज वाली कंपनियों को नया बैंकों के कंसोर्टियम के माध्यम से मिलेगा और मौजूदा ऋण भी कंसोॢटयम के तहत चला जाएगा। 

कंपनियां का आमतौर पर विभिन्न बैंकों के साथ अलग-अलग उधारी सीमा होती है। हालांकि उधारी सीमा समान रहेगी लेकिन ऋणदाताओं के कंसोर्टियम होने से उसकी निगरानी और नियंत्रण सही तरीके से किया जा सकेगा। एक अन्य बैंक के अधिकारी ने कहा, 'कई बैंकों से कर्ज की सुविधा होने से बैंकों को ऋणदाता और कर्जदार के बीच होने वाले लेनदेन के बारे में जानकारी नहीं होती है। लेकिन कंसोर्टियम से इसकी निगरानी बेहतरी होगी। सभी ऋण को कंसोर्टियम के तहत लाया जाएगा और हमें लगता है कि वाजिब कर्जदार को इससे कोई समस्या नहीं होगी।' उन्होंने कहा कि कंसोर्टियम के तहत कर्ज देने के लिए समान दस्तावेज, समान जमानत और ज्यादा वित्तीय नियंत्रण होगा।

मानक नियमपत्रों के साथ एक साझा ऋण दस्तावेज होगा जिसका पालन कंसोर्टियमों के लिए होगा और कंसोर्टियम के तहत केवल एक ही बैंक को नकद प्रबंधन सुविधा की जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे पहले इसी वर्ष सरकार ने कहा था कि बैंकों के बीच बेहतर तालमेल के लिए कंसोर्टियम के तहत बैंकों की संख्या में उल्लेखनीय कमी की जाएगी। इसे 20-22 से घटाकर अधिकतम 10 किया जाएगा।

सार्वजनिक बैंकों ने कंपनियों के लिए ऋण देने की प्रक्रिया को और सख्त बनाने का फैसला किया है। इसके तहत प्रवर्तकों को अग्रिम इक्विटी देने को कहा जाएगा और कंपनियों की घाटे को सहने की क्षमता का सत्यापन करके इक्विटी की गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा।

साथ ही बैंक निर्माण अवधि में ब्याज को वित्तपोषित करने से भी परहेज करेंगे। रिजर्व बैंक ने बैंकों को ऐसी परियोजनाओं को फंड देने की अनुमति दे रखी है जिनकी लागत बढ़ गई है। वे ऐसी कर्ज को पुनर्गठित परिसंपत्ति माने बिना ऐसा कर सकते हैं।
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