घाटे में बैंकों की विदेशी शाखा

सोमेश झा/एजेंसियां | नई दिल्ली Mar 16, 2018 10:39 PM IST

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की एक चौथाई विदेशी शाखाओं ने पिछले वित्त वर्ष में नुकसान दर्ज किया। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने आज लोकसभा में बताया, पीएसबी के आंकड़ों के मुताबिक विदेश में परिचालित इनकी 159 शाखाओं में से 41 ने वित्त वर्ष 2016-17 में नुकसान दर्ज किया। पंजाब नैशनल बैंक में हुए 129 अरब रुपये के घोटाले ने भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को जांच के घेरे में ला दिया है नीरव मोदी व मेहुल चोकसी के मामले में क्योंकि हजारों लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिए धोखाधड़ी वाले लेनदेन कथित तौर पर पिछले सात साल में देसी व विदेशी शाखाओं के बीच हुए।

जिन विदेशी शाखाओं मे नुकसान दर्ज किया है उनमें सबसे ज्यादा भारतीय स्टेट बैंक (नौ) की है। इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया (आठ), बैंक ऑफ बड़ौदा (सात), इंडियन ओवरसीज बैंक (पांच) और केनरा बैंक (चार) का स्थान है। बहामा, कंबोडिया, वियतनाम और चैनल्स आइलैंड व म्यांमार में पीएसबी की सभी शाखाओं ने 2016-17 में नुकसान दर्ज किया। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, चीन, केन्या, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, थाइलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन आदि में भारतीय बैंकों की शाखाओं ने नुकसान दर्ज किया।

शुक्ला ने कहा, पीएसबी की सभी विदेशी शाखाओं ने आपसी संपर्क के जरिए अपनी विदेशी शाखाओं को तर्कसंगत बनाने के लिए संयुक्त रूप से एक नोट तैयार करने की पहल की है। बैंकों की तरफ से चिन्हित इन शाखाओं को बंद किए जाने पर कार्रवाई विभिन्न चरणों में है।

वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव कुमार ने 1 मार्च को कहा था कि पीएसबी अपने 25 विदेशी परिचालन को तर्कसंगत बनाएंगे। इसके अलावा 69 अन्य की पहचान इस बाबत जांच के लिए हुई है। योजना के मुताबिक, बैंक अनुपयुक्त परिचालन को बंद करेंगे और उस इलाके में परिचालन को एकीकृत करेंगे। उदाहरण के लिए इस साल 31 जनवरी को ब्रिटेन में बैंक ऑफ बड़ौदा की 10 शाखाएं, एसबीआई की 12 और बैंक ऑफ इंडिया की 7 शाखाएं थी।

पीएनबी घोटाला: नहीं हो सकती समानांतर जांच 
केंद्र सरकार ने आज सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि 11,000 करोड़ रुपये के पंजाब नैशनल बैंक घोटाला मामले की जांच में अदालत द्वारा 'समानांतर पूछताछ' और 'समानांतर निगरानी' नहीं की जा सकती है। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सीबीआई को दी गई उस सलाह विरोध करते हुए यह बात कही जिसमें मामले की जांच बंद जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाले पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा था कि जांच एजेंसियों द्वारा इस मामले की जांच शुरू करने से पहले ही लोग जनहित याचिका के साथ अदालत आने लगे थे।

वेणुगोपाल ने पीठ से कहा, 'क्या इसका कोई औचित्य है कि कोई एक जनहित याचिका दायर कर इस अदालत में आए और कहे कि अदालत को जांच की स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए? अदालतों द्वारा समानांतर पूछताछ और समानांतर निगरानी नहीं की जा सकती है।' इस पीठ के सदस्यों में न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर और डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे। 

उन्होंने कहा, 'सैद्धांतिक तौर पर न केवल इस अदालत के लिए बल्कि किसी भी अदालत के लिए इसका क्या औचित्य है कि सरकार इस प्रकार की रिपोर्ट मांगी जाए जैसे कोई समानांतर पूछताछ चल रही हो।' अटॉर्नी जनरल ने अपनी दलील में कहा कि जब तक याची द्वारा कुछ गलत न दिखाया गया हो तक तक ऐसी याचिका पर अदालत को ध्यान नहीं देना चाहिए। इसे एक गंभीर मामला बताते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि इससे जांच एजेंसियों का मनोबल प्रभावित होगा। उन्होंने वकील विनीत धांडा द्वारा दायर याचिका का विरोध किया। धांडा ने अपनी याचिका में पीएनबी मामले की स्वतंत्र जांच और हीरा कारोबारी नीरव मोदी को वापस लाने के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है।
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