पीएनबी को अब सूचनाएं बाहर जाने का सता रहा डर

पवन बुरुगुला | मुंबई Mar 18, 2018 10:07 PM IST

पंजाब नैशनल बैंक का घोटाला

पंजाब नैशनल बैंक के मौजूदा घटनाक्रम ने कीमत से जुड़ी संवेदनशील सूचना को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के इस लेनदार को मुश्किल में खड़ा कर दिया है। बैंक प्रबंधन के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि प्रमुख सूचना एक साथ स्टॉक एक्सचेंजों व जांच एजेंसियों के पास पहुंचे। हालिया घटनाक्रम के चलते बैंक हर तरह की प्रगति का खुलासा एकसमान तरीके से करने में सक्षम नहीं है।

5 फरवरी को पीएनबी ने स्टॉक एक्सचेंजो को सूचित किया कि इसे एक शाखा में संदिग्ध धोखाधड़ी का पता चला है, जहां कई तरह की अनियमितता देखने को मिली है। शुरू में बैंक ने कहा था कि धोखाधड़ी से जुड़ी रकम महज 2.8 अरब रुपये है। 11 फरवरी के खुलासे में बैंक ने कहा कि इसे धोखाधड़ी व अनधिकृत लेनदेन का पता चला है और इससे 1.78 अरब रुपये की रकम जुड़ी है। इसने कहा कि जांच के लिए इसे कानूनी प्रवर्तन एजेंसियों के हवाले कर दिया गया है और कानून के मुताबिक दोषी के खिलाफ मामला दर्ज करने को कहा गया है।

सार्वजनिक क्षेत्र के इस बैंक ने अदालत को दी सूचना में संदिग्ध घोखाधड़ी की रकम में फिर संशोधन किया। हालांकि बैंक ने तब तक सूचना का खुलासा नहीं किया जब तक कि स्टॉक एक्सचेंजों ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्पष्टीकरण की मांग नहीं की। एक्सचेंज को दी सूचना में पीएनबी ने कहा कि इसने गीतांजलि समूह के कंसोर्टियम को दिए कर्ज को धोखाधड़ी की रकम में शामिल किया है।

कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि धोखाधड़ी की खबर लगने के बाद ऐसी सूचना का खुलासा जल्द से जल्द किया जाना चाहिए। वास्तव में पीएनबी का शेयर इस धोखाधड़ी के खुलासे के बाद से ही भारी बिकवाली के दबाव में रहा है। जनवरी के स्तर से यह शेयर 50 फीसदी टूट चुका है। विशेषज्ञों ने कहा, कीमत के मामले में संवेदनशील होने के नाते धोखाधड़ी से जुड़ी आगे की प्रगति निवेश का फैसला लेने के लिहाज से इसके शेयरधारकों के लिए महत्वपूर्ण है। फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के संस्थापक संदीप पारेख ने कहा, खुलासा नियमों के तहत सूचीबद्ध कंपनियां को किसी अहम प्रगति की जानकारी अपने शेयरधारकों को जल्द से जल्द देनी जरूरी होती है। इसमें नाकाम होने पर सेबी जुर्माना लगा सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा, हालांकि अप्रत्याशित हालात में नियमों का पूरी तरह से पालन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कुछ खास परिदृश्य मसलन धोखाधड़ी के समय स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी देने से गुनाह करने वालों को एजेंसियों से आगे रहन में मदद कर सकता है।
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