'बैंक सुधार पर कुंडली मारकर बैठी सरकार'

सोमेश झा | नई दिल्ली Mar 19, 2018 10:09 PM IST

बैंकों के लिए स्वामित्व से अलग ढांचा बनाने की मांग

ऊर्जित पटेल ने भी कुछ दिन पहले की थी इसकी वकालत
सरकार और ब्यूरो के बीच नहीं है कोई संपर्क

बैंक बोर्ड ब्यूरो (बीबीबी) के अध्यक्ष विनोद राय ने आज आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सुधार के लिए दी गई सिफारिशों पर कुंडली मारकर बैठी है। साथ ही उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र के लिए स्वामित्व के ढांचे से स्वतंत्र नियम बनाने की भी मांग की। रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने भी कुछ दिन पहले इसी तरह की बात की थी।  राय सहित बीबीबी के सभी सदस्यों का कार्यकाल 31 मार्च को खत्म हो रहा है और उससे करीब 10 दिन पहले उन्होंने अपनी 60 पन्नों की रिपोर्ट सौंप दी। इसमें ब्यूरो द्वारा पिछले 2 साल के दौरान किए गए कार्यों के बारे में बताया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार और बीबीबी के बीच संवाद की स्थिति नहीं थी। सरकारी क्षेत्र के बैंकों के कामकाज में सुधार के लिए पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय की अध्यक्षता में फरवरी 2016 में बीबीबी का गठन किया गया था। राय ने भविष्य में बीबीबी की भूमिका का ढांचा तैयार करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली को पिछले साल 26 जुलाई को भेजे गए पत्र का भी जिक्र किया है।

राय ने विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करने के लिए जेटली से मिलने का समय मांगा था। इनमें एक मुद्दा सरकार और बीबीबी के बीच संबंधों को लेकर भी था। राय ने रिपोर्ट के फुटनोट में कहा, 'ब्यूरो को अब भी वित्त मंत्री के साथ बैठक का इंतजार है।' उन्होंने संकेत दिया कि जबसे ब्यूरो ने सरकारी बैंकों के कामकाज में सुधार के लिए सरकार को अपनी सिफारिशें दी हैं तबसे उनकी वित्त मंत्री के साथ कोई बैठक नहीं हुई है।

राय ने पिछले साल जुलाई में जेटली को भेजे पत्र में कहा कि अगर ब्यूरो और वित्त मंत्रालय के साथ व्यापक संपर्क और बातचीत होगी तो विशेषज्ञ सरकारी बैंकों के कामकाज और प्रदर्शन से जुड़े मामलों में वित्त मंत्री को अपने उपयोगी सुझाव देंगे। अभी तो ब्यूरो महज नियुक्ति बोर्ड की तरह काम कर रहा है।उन्होंने कहा कि ब्यूरो को इस बात की जानकारी नहीं है कि उसने सरकार को जो सिफारिशें दी हैं उन पर क्या प्रगति हुई है क्योंकि उसका सरकार के साथ कोई संपर्क नहीं है। पत्र में ब्यूरो ने अपनी सिफारिशों के क्रियान्वयन के बारे में प्रत्येक छह महीने में वित्त मंत्री को स्वतंत्र फीडबैक देने का भी सुझाव दिया था।

राय ने वित्त मंत्रालय से यह भी कहा कि बीबीबी हितों के टकराव को कम करने में भी सक्षम है क्योंकि आरबीआई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की नियामक होने के साथ ही साथ उसकी निरीक्षणकर्ता भी है। ऐसे में आरबीआई की नियामक एवं निरीक्षणकर्ता की भूमिका को तटस्थ स्वामित्व वाला बनाया जाना चाहिए। उनका यह बयान उस संदर्भ में आया है जब आरबीआई ने इस पर चिंता जताई कि पीएसबी के नियामक के तौर पर उसकी भूमिका सीमित है। 

राय ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'सरकार अगर अपनी बहुलांश हिस्सेदारी बनाए रखती है तो इसकी पूरी संभावना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी क्षेत्र की तरह ही समान दक्षता स्तर पर पहुंच जाएं।'पिछले हफ्ते पटेल ने बैंक नियामक की तटस्थ स्वामित्व की भूमिका की वकालत की थी और कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के नियमन के लिए नियामक के पास बहुत सीमित अधिकार हैं क्योंकि उसके पास सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बोर्ड को हटाने या बैंकों के विलय करने या किसी भी बैंक के लाइसेंस को रद्द करने का अधिकार नहीं है।

राय ने बीबीबी को सौंपे गए उत्तरदायित्व पर हुई प्रगति के बारे में बिंदुवार ढंग से बताया। रिपोर्ट के अनुसार 13 बिंदुओं में ब्यूरो के स्तर पर 7 पर निर्णय लिए जा चुके थे, जबकि 3 सरकार द्वारा इसकी सिफारिशें के क्रियान्वयन पर निर्भर थे। 3 बिंदुओं पर काम चल रहा था और ब्यूरो ने 1 में अपने आप को किनारे कर लिया। रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय को मार्च 2017 में सरकारी बैंकों में आचार संहिता पर भेजी गई बीबीबी की सिफारिशों को दोबारा पेश किया गया। ब्यूरो ने कहा कि विभिन्न सुधारों पर की गई सिफारिशों पर उसे वित्तीय सेवा विभाग से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। ये सिफारिशें नियुक्ति में सुधार, मुआवजा, प्रदर्शन की समीक्षा और संचालन आदि शामिल थे।

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