पीएनबी ने अंकेक्षक पर लगाया आरोप

सोमेश झा | नई दिल्ली Mar 21, 2018 09:36 PM IST

सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नैशनल बैंक ने मुंबई की अपनी ब्रैडी हाउस शाखा से 129 अरब रुपये के घोटाले को उजागर करने में विफलता के लिए नियमित अंकेक्षक (कॉन्करेंट ऑडिटर) पर निशाना साधा है। नीरव मोदी और मेहुल चोकसी समूह की कंपनियों को इसी शाखा से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी कर घोटाले को अंजाम दिया गया था। पीएनबी ने सरकार और जांच एजेंसियों को भेजे अपने जवाब में कहा है कि अंतरराष्टï्रीय मैसेजिंग प्रणाली स्विफ्ट के जरिये पिछले सात साल से गलत तरीके से एलओयू जारी किए जा रहे थे। बैंक ने सरकार को बताया, 'कोर बैंकिंग सिस्टम के व्यापार मॉड्ïयूल के साथ स्विफ्ट मैसेजिंग प्रणाली को नहीं जोड़ा गया था और नियमित अंकेक्षक ने इस अनियमितता की ओर इशारा भी नहीं किया।'
 
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी अब तक स्विफ्ट संचार प्रणाली एवं बैंक के संदेशों का फोरेंसिक ऑडिट भी नहीं किया है। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने मंगलवार को राज्य सभा में एक लिखित जवाब में कहा था कि आरबीआई ने इस प्रकार के जोखिम से बचने के लिए चुनिंदा बैंकों के परिचालन नियंत्रण ढांचे की जांच की थी। पीएनबी के वरिष्ठï अधिकारियों द्वारा मोदी और चोकसी की कंपनियों को गलत तरीके से एलओयू बिना किसी स्वीकृत सीमा के जारी किए गए। इसकी जानकारी पीएनबी के ट्रेड फाइनैंस मॉड्ïयूल पर भी नहीं दी गई जिससे लेनदेन को आसानी से छिपाया जा सका। पीएनबी के पूर्व अधिकारी विष्णुव्रत मिश्रा को सीबीआई पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। मिश्रा 2011 से 2015 के बीच पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा में बतौर नियमित अंकेक्षक काम कर रहे थे। जांच एजेंसी के निशाने पर मोहिंदर कुमार शर्मा भी हैं जो उस शाखा में आंतरिक मुख्य अंकेक्षक थे। रोजाना लेनदेन की जांच करने और अनियमितता के बारे में पीएनबी को सूचित करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
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