पीएनबी को आरबीआई से राहत!

सोमेश झा | नई दिल्ली Mar 27, 2018 09:40 PM IST

पीएनबी घोटाला

आरबीआई ने बैंक को घोटाले की रकम के लिए चार तिमाहियों तक प्रावधान करने की अनुमति दी
घोटाले की पूरी रकम एनपीए बनने जा रही है और इससे बैंक की 480 अरब रुपये की अनुमानित शुद्ध हैसियत करीब 25 फीसदी प्रभावित हो सकती है
एलओयू से संबंधित रकम का भुगतान यदि इस तिमाही के अंत तक नहीं हुआ तो पीएनबी के पास अन्य बैंकों का डिफॉल्टर होने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) के उस आग्रह को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है जिसके तहत बैंक ने नीरव मोदी व मेहुल चोकसी द्वारा की गई धोखाधड़ी से संबंधित घाटे को चार तिमाहियों के दौरान बहीखाते पर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। पीएनबी के कर्मचारियों द्वारा मोदी और चोकसी के स्वामित्व वाली कंपनियों को धोखाधड़ी के जरिये 129 अरब रुपये के लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी किए जाने से 2017-18 में बैंक को 145 अरब रुपये का झटका लगा है।

दिल्ली के इस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के सूत्रों ने बताया, 'हालांकि हम अब भी इस संबंध में नियामक से लिखित संदेश का इंतजार कर रहे हैं।' जांच एजेंसियों को यह मामला सौंपे जाने के बाद पीएनबी ने उन दोनों खातों को धोखाधड़ी करार दिया था। आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंक को धोखाधड़ी वाले इन खातों की पूरी रकम के लिए अपने बहीखाते पर प्रावधान की रकम अलग रखना पड़ेगा। इन दोनों मामले में घोटाले की रकम 136 अरब रुपये है जिसके लिए पंजाब नैशनल बैंक को मार्च में समाप्त तिमाही के दौरान बहीखाते पर प्रावधान करना पड़ेगा। बैंक ने कहा है कि इन लेनदेनों की प्रकृति आकस्मिक थी।

रिजर्व बैंक के इस फैसले से पीएनबी को राहत मिलेगी क्योंकि इसके बिना उसे अपनी एक तिहाई शुद्ध हैसियत को जोखिम पर रखना पड़ता। पीएनबी को घोटाले की इतनी बड़ी रकम के लिए यदि एक ही तिमाही में प्रावधान रखना पड़ता तो उसकी परिसंपत्ति की गुणवत्ता को तगड़ा झटका लग सकता था। विश्लेषकों का कहना है कि घोटाले की पूरी रकम गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बनने जा रही है और इससे बैंक की 480 अरब रुपये की अनुमानित शुद्ध हैसियत करीब 25 फीसदी प्रभावित हो सकती है।

अप्रैल 2016 में आरबीआई की ओर से जारी 'धोखाधड़ी खाते से संबंधित प्रावधान' दिशानिर्देशों में कहा गया है, 'तिमाही मुनाफे और घाटे पर इस प्रकार के प्रावधान के सीमित प्रभाव के लिहाज से बैंकों के पास एक खास अवधि में प्रावधान करने का विकल्प होगा जो धोखाधड़ी उजागर होने की तिथि से चार तिमाही के भीतर होनी चाहिए।' पीएनबी को अपने नदकी भंडार में से प्रावधान की रकम किस्तों में घटानी पड़ेगी क्योंकि अब उसे प्रावधान की पूरी रकम अलग करने के लिए पूरे वित्त वर्ष तक के समय की सहूलियत होगी। पीएनबी के वरिष्ठï अधिकारियों ने कहा कि पुनर्भुगतान की रकम को एनपीए में तब्दील होने से पहले बैंक को एलओयू से संबंधित अन्य बैंकों की 'बोनाफाइड' प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना पड़ेगा। यदि एलओयू का पुनर्भुगतान नहीं किया गया तो वह मई से ही एनपीए में तब्दील होना शुरू हो जाएगा।

पीएनबी के सूत्रों ने कहा, 'एलओयू से संबंधित रकम का भुगतान यदि इस तिमाही के अंत तक नहीं हुआ तो पीएनबी के पास अन्य बैंकों का डिफॉल्टर होने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। एलओयू के एनपीए में तब्दील होने पर डिफॉल्टर होने का खतरा पैदा हो जाएगा जो इस समय-सीमा के 90 दिनों के बाद होगा। बैंक कभी भी डिफॉल्टर होना नहीं चाहेगा।' सूत्रों के अनुसार, यूको बैंक की सबसे अधिक करीब 30 अरब रुपये की पूंजी इस घोटाले से संबंधित है। उसके बाद करीब 25 अरब रुपये के साथ यूनियन बैंक और इतनी ही रकम के साथ इलाहाबाद बैंक का स्थान है।
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