नकदी संकट की वजह से बैंकों ने बढ़ाया ब्याज

अद्वैत राव पालेपू और निकहत हेटवकर | मुंबई Mar 29, 2018 10:05 PM IST

भारतीय स्टेट बैंक ने जमा दरों में बढ़ोतरी जारी रखी है। जनवरी से 3 बार जमा दरें बढ़ाई जा चुकी हैं। इससे एक दिलचस्प बात सामने आती है कि अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें बढ़ रही हैं और इसका कोई असर नहीं है कि भारतीय रिजर्व बैंक अपने मौैद्रिक नीति दरों में क्या फैसला करता है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक 5 अप्रैल को नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। साथ ही शेष कैलेंडर वर्ष में भी बदलाव की कोई संभावना नहीं है। आदर्श रूप में देखें तो केंद्रीय बैंक जो करता है, उसका पालन वाणिज्यिक बैंक करते हैं। लेकिन भारत की बैंकिंग व्यवस्था में बमुश्किल ऐसा सामने आता है कि नीतिगत फैसलों को चुनौती दी गई हो। 
 
स्टेट बैंक द्वारा दरों में बढ़ोतरी की एक वजह बॉन्ड यील्ड है, जो जमा और उधारी दरों की गणना में आधार का काम करता है। इसके अलावा प्रतिस्पर्धा भी एक वजह है।  ज्यादातर अन्य बैंकों जैसे बैंक आफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक ने भी पिछले कुछ महीनों में अपनी खुदरा और बड़ी जमा दरों में बढ़ोतरी की है और उधारी दरें भी बढ़ाई हैं। स्टेट बैंक के खुदरा व डिजिटल बैंकिंग के प्रबंध निदेशक पीके गुप्ता ने कहा, 'अन्य ने पहले ही दरें बढ़ा दी हैं और हमारी दरें उनकी तुलना में कम हैं। ऐसे में हम अपनी दरों को बाजार के मुताबिक कर रहे हैं।'  यह बैंकों के लिए एक तरह का मानकीकरण है। 
 
इक्रा के वरिष्ठ निदेशक कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा, 'बीते दिनों मेंं दरों में बहुत ज्यादा कटौती की गई और इसके पहले बैंकों ने इस तरह की पेशकश नहीं की।' श्रीनिवासन के मुताबिक बैंक कम ब्याज दर की पेशकश का बोझ वहन कर सकते थे क्योंकि नोटबंदी के बाद भारी मात्रा में नकदी आई। अब बैंकों के पास उस तरह की सुविधा नहीं है।  पिछले कुछ महीनों में (वित्त वर्ष  2018 की तीसरी और चौथी तिमाही में) कुछ सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बैंकों ने अपनी उधारी दर और जमा दर दोनों में ही बदलाव किया है। कुछ ने दरें बढ़ाई हैं, जबकि अन्य ने दरें कम कर दी हैं।
 
स्टेट बैंक ने पहली बार जनवरी में अपनी सावधि जमा की ब्याज दरों में 50 से 140 बीपीएस बढ़ोतरी की थी। और ऐसा फिर फरवरी में किया गया और ब्याज दरें 25 से 75 बीपीएस बढ़ा दी गईं। यह विभिन्न तरह की परिपक्वता के लिए बढ़ाई गई थी, जिसमें खुदरा व थोक दोनों शामिल है। यह बॉन्ड यील्ड की अनुमानित गति की तुलना में बहुत ज्यादा तेज थी।  ज्यादा अवधि के लिए जमा दरें पहले कम थीं क्योंकि यह अनुमान लगाया गया था कि दीर्घावधि के हिसाब से दरें कम रहेंगी। गुप्ता ने कहा, 'यील्ड में बदलाव तेज होने और एक साल के बॉन्ड यील्ड और 10 साल के बॉन्ड यील्ड में अंतर बढ़ गया, जिसकी वजह से हमने अपनी दरें बाजार के अनुरूप करने की कवायद की।' 
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