फिलहाल कटौती नहीं आगे दरें घटने की आस

निकहत हेटावकर और अद्वैत राव पलेपू | मुंबई Mar 30, 2018 09:34 PM IST

इस बात पर स्पष्टï सहमति है कि अगले हफ्ते होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सभी छह सदस्य रीपो दर को 6 फीसदी पर बरकरार रखने का निर्णय कर सकते हैं। हालांकि इसकी थोड़ी गुंजाइश बन रही है कि आरबीआई भविष्य में दरें कम कर सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की ओर से 15 अर्थशास्त्रियों और बैंकरों के बीच कराए गए सर्वेक्षण में इसका खुलासा हुआ है। 2018-19 के लिए 4 से 5 अप्रैल को पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति की बैठक होने जा रही है, जिसमें दरों में किसी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों की राय है कि मुद्रास्फीति के सहज दायरे में रहने और वृद्घि में नमरी को देखते हुए आरबीआई दरों में कटौती के कदम उठाने के लिए प्रेरित हो सकता है।
 
खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में 4.4 फीसदी रही, जो आरबीआई के मार्च के अनुमान 5.1 फीसदी से कम है। इसकी भी संभावना है कि मार्च में मुद्रास्फीति दर और घट जाए। ऐसे में आरबीआई के पास विकास दर को बढ़ावा देने के लिए दरों में कटौती की गुंजाइश बन सकती है। एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरूआ ने कहा, 'हालिया मुद्रास्फीति के आंकड़े सकारात्त्मक रहे हैं, ऐसे में मौद्रिक नीति समिति फिलहाल इंतजार करने का रुख अपना सकती है। वह मार्च के मुद्रास्फीति के अनुमान को संशोधित कर सकती है।' हालांकि बरूआ ने कहा कि आरबीआई फिलहाल दरों में कटौती नहीं करेगा। 
 
एसबीआई समूह के ग्रुप मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा कि मुद्रास्फीति के 3.5 फीसदी नीचे आने की संभावना है। ऐसे में आरबीआई के पास इस साल 25 आधार अंक कटौती की सहूलियत होगी। लेकिन सर्वेक्षण में शामिल 15 में से केवल 2 अर्थशास्त्रियों ने ही दरों में कटौती की बात कही है। 6 लोगों ने दरों में कम से कम 25 आधार अंक की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है, जबकि 4 ने यथास्थिति बनाए रखने पर अपनी राय जाहिर की। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा, 'अगले 6 महीने तक दरों में कटौती की उम्मीद कम ही है लेकिन आगे का रुख खाद्य पदार्थों की कीमतें, मुद्रास्फीति और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा।' आईसीआईसीआई सिक्योरिटी प्राइमरी डीलरशिप के मुख्य अर्थशास्त्री ए प्रसन्ना ने कहा, 'इस साल रीपो दर में 50 आधार अंक का इजाफा हो सकता है।'  कोटक महिंद्रा बैंक की वरिष्ठï अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा कि डेट में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निवेश सीमा बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं। सरकारी डेट में विदेश्शी पोर्टफोलियो निवेशकों की निवेश सीमा बढ़ाकर 5 फीसदी की जा सकती है।
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