दीपक कोछड़ ने कहा, देनदारी सहित बाजार भाव पर खरीदे शेयर

श्रेया जय | नई दिल्ली Apr 04, 2018 10:01 PM IST

न्यूपावर की हिस्सेदारी

न्यूपावर की 180 मेगावॉट क्षमता परिचालन में, बाकी कागजों में सीमित
ईचंदा ऊर्जा नाम की एसपीवी में न्यूपावर की 100 मेगावॉट क्षमता का किया गया हस्तांतरण
विंड टरबाईन कंपनी न्यूपावर टेक्नोलॉजी अब परिचालन में नहीं है

वर्ष 2010 में जब दीपक कोछड़ के पिनेकल ट्रस्ट ने वेणुगोपाल धूत की सुप्रीम एनर्जी से न्यूपावर की हिस्सेदारी खरीदी थी तब सौदे में 64 करोड़ रुपये की कर्ज देनदारी भी साथ में मिली थी। कोछड़ अभी न्यूपावार के प्रबंध निदेशक हैं। धूत के वीडियोकॉन समूह को ऋण मंजूर करने वाली समिति में कोछड़ की पत्नी और आईसीआईसीआई बैंक की मुख्य कार्याधिकारी एवं प्रबंध निदेशक चंदा कोछड़ के शामिल रहने से हितों के टकराव को लेकर वे सवालों के घेरे में हैं। कोछड़ ने टेलीफोन पर बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में बताया, 'पिनेकल ट्रस्ट ने जब सुप्रीम एनर्जी की हिस्सेदारी खरीदी थी, तो उसमें 64 करोड़ रुपये की देनदारी भी शामिल थी। यह सौदा उचित बाजार भाव 8.80 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से किया गया था।' उन्होंने होल्डिंग कंपनी सुप्रीम एनर्जी के शेयर पिनेकल ट्रस्ट को बेचे जाने के मामले में हितों के टकराव से इनकार किया है।

न्यूपावर को 2010 में सुप्रीम एनर्जी से 64 करोड़ रुपये का कर्ज (पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर) मिला था। सुप्रीम एनर्जी वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के 99.9 फीसदी स्वामित्व वाली कंपनी थी और मार्च 2010 तक न्यूपावर की बहुलांश हिस्सेदारी सुप्रीम एनर्जी के पास थी। कोछड़ न्यूपावर में धूत के साथ सह-प्रवर्तक थे। नियामकीय जानकारी के अनुसार धूत ने अपनी पूरी हिस्सेदारी महेश चंद्र पुगलिया को बेच दी थी, जिसने अपनी पूरी हिस्सेदारी 9 लाख रुपये में पिनेकल ट्रस्ट को हस्तांतरित कर दी। इस ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी कोछड़ थे। 

न्यूपावर की वेबसाइट पर कुल क्षमता 700 मेगावॉट पवन ऊर्जा बताई गई है लेकिन कंपनी का पोर्टफोलियो इतना बड़ा नहीं है। कोछड़ ने कहा कि न्यूपावर की 180 मेगावॉट की पवन ऊर्जा परियोजना परिचालन में है।  520 मेगावॉट परियोजना निर्माणाधीन हैं और उनमें से कुछ के लिए अभी तक तो स्थान की पहचान भर की गई है। कोछड़ ने बताया, 'न्यूपावर के पास 520 मेगावॉट अतिरिक्त क्षमता नहीं है और न ही इसके पास कोई रियल एस्टेट या संबंधित परियोजनाएं हैं।'

कोछड़ ने 2016 को मीडिया को बताया था कि वह तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में 500 मेगावॉट पवन ऊर्जा परियोजनाएं लगाने की योजना बना रहे हैं। न्यूपावर ने अपनी निर्माणाधीन 400 मेगवॉट परियोजना को तीन साल पहले बेचने का प्रयास किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। पवन ऊर्जा क्षेत्र की दो अग्रणी कंपनियों ने कहा कि न्यूपावर ने इसका मूल्यांकन 1.7 से 1.8 अरब रुपये किया था, जो काफी ज्यादा था। 

केंद्र सरकार ने 2017 में पवन ऊर्जा क्षेत्र के लिए प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप स्थापित परियोजनाओं के लिए शुल्क पद्घति आकर्षक नहीं रह गई और साइट की पहचान एवं शुल्क का निर्धारण बिजली नियामक के द्वारा किया जाने लगा। मार्च 2017 में न्यूपावर ने अपनी परिचालन वाली 100 मेगावॉट क्षमता को विशेष उद्देश्यीय कंपनी (एसपीवी) ईचंदा ऊर्जा प्रा. लि. को हस्तांतरित कर दी। एसपीवी समूह की कैप्टिव योजना का हिस्सा थी, जिसमें 10 अन्य साझेदार थे। इसका गठन 'रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट स्कीम' के तहत पवन ऊर्जा की बिक्री के लिए किया गया था।

ईचंदा ऊर्जा में न्यूपावर के जरिये कोछड़ की 70.01 फीसदी हिस्सेदार थी। अन्य साझेदारों में तमिलनाडु की हटसन एग्रो (6.11 फीसदी), मदरसन सुमी (1.66 फीसदी), गोविंदराजा टेक्सटाइल (6.55 फीसदी), दंंडपाणि सीमेंट, लॉयल टेक्सटाइल, केविनकेयर, जुआरी सीमेंट आदि शामिल हैं। एक अन्य एसपीवी न्यूपावर विंड फार्म है, जो आरईसी कारोबार से जुड़ी है।कैप्टिव योजना के तहत कई वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए एकीकृत उपयोग के लिए बिजली संयंत्र स्थापित किया जाता है।

इसमें डेवलपर की कम से कम 26 फीसदी हिस्सेदारी होनी चाहिए और इससे पैदा होने वाली कम से कम 51 फीसदी बिजली का उपभोग डेवलपर को कहना होगा। न्यूपावर 2011 तक मुनाफे में थी लेकिन इसके बाद अचानक घाटे में आ गई। 2010-11 में 5.9 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने के बाद अगले साल उसे 6.9 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। 2012 में सरकार ने पवन ऊर्जा क्षेत्र की सभी कर रियायतें वापस ले ली थीं जिससे इस क्षेत्र को नुकसान हुआ। न्यूपावर के पास महाराष्ट्र में 30 मेगवॉट की परियोजना है, जिसकी बिजली राज्य डिस्कॉम को की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार भारत में विंड टरर्बाइन और जेनरेटर बनाने के लिए गठित न्यूपावर टैक्नोलॉजी अब परिचालन में नहीं है। यह इकाई गुजरात में है। इसके बारे में पड़ताल करने पर न्यूपावर टेक्नोलॉजी के निदेशकों ने न्यूपावर के किसी विनिर्माण योजना से इनकार किया। 2014-15 में इसका कारोबार 45 लाख रुपये का था और इसे 11.78 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

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