रिजर्व बैंक ने नीतिगत दर में नहीं किया बदलाव

भाषा | मुंबई Apr 05, 2018 05:30 PM IST

विश्व बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दाम से महंगाई बढ़ने को लेकर चिंतित रिजर्व बैंक ने आज अपनी नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्रीय बैंक को खाद्यान्नों के दाम बढऩे और राजकोषीय लक्ष्यों के हासिल नहीं होने की चिंता भी सता रही है। हालांकि, उसने कहा है कि 2018-19 में आर्थिक वृद्धि दर बढ़कर 7.4 प्रतिशत हो जाएगी। रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल के नेतृत्व में मौद्रिक नीति समिति ( एमपीसी) को उम्मीद है कि निवेश गतिविधियां बढऩे से चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि की दर बढ़कर 7.4 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।

पिछले वित्त वर्ष में यह 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। एमपीसी ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में खाद्यान्न के दाम में नरमी को देखते हुए खुदरा मुद्रास्फीति के 4.7 प्रतिशत से 5.1 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान लगाया है। चालू वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर को पूर्वस्तर पर बरकरार रखे जाने से आवास, वाहन के लिए कर्जदारों की मासिक किस्तों पर कोई असर नहीं होगा। हालांकि, बैंक अपनी संपत्ति देनदारी स्थिति को देखते हुए जमा और कर्ज की ब्याज दरों में बदलाव करने के लिए मुक्त हैं। एमपीसी ने लगातार चौथी बार रीपो दर में यथास्थिति बनाए रखी। इससे पहले पिछले साल अगस्त में रीपो दर में चौथाई फीसदी कटौती की गई थी। तब से यह  छह प्रतिशत पर बनी हुई है।

रीपो दर वह दर होती है जिस पर अन्य बैंक, रिजर्व बैंक से अपनी फौरी जरूरतों के लिए अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। दूसरी तरफ रिवर्स रीपो दर भी 5.75 प्रतिशत पर टिकी रही। रिवर्स रीपो दर वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों से नकदी उधार लेकर उनके पास उपलब्ध अतिरिक्त नकदी को सोखता है। एमपीसी का आज का निर्णय उसके तटस्थ रुख के अनुरूप है। समिति ने आर्थिक वृद्धि को समर्थन देते हुए मध्यम अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत ऊपर- नीचे घटबढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य रखा है।

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