आरबीआई ने बैंकों को दी राहत

श्रीपद एस ऑटे | मुंबई Apr 05, 2018 11:02 PM IST

 

 

सोमवार को बैंकों को मार्क-टु-मार्केट प्रावधान चार तिमाही में फैलाने की अनुमति देने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने आज प्रावधान के मामले में बैंकों को एक और राहत दी। आरबीआई ने भारतीय लेखा मानक का क्रियान्वयन एक साल यानी अप्रैल 2019 तक के लिए टाल दिया। मौद्रिक नीति में आरबीआई ने कहा, भारतीय लेखा मानक के मुताबिक वित्तीय विवरण का प्रारूप तैयार करने की खातिर कुछ जरूरी विधायी संशोधन की दरकार है और यह विचाराधीन है, लिहाजा नए लेखा मानक की ओर बढऩे के मामले में कई बैंकों की तैयारी के स्तर को देखते हुए भारतीय लेखा मानक का क्रियान्वयन एक साल के लिए टाल दिया गया। इस कदम से बैंकों का प्रावधान का बोझ घटेगा। 

भारतीय लेखा मानक अपनाने के चलते गैर-निष्पादित आस्तियों के प्रावधान के आकलन के लिए नए तरीके का इस्तेमाल करना होगा। ऐसे में बैंकों की तरफ से करीब 30 फीसदी ज्यादा प्रावधान दर्ज किए जाने की उम्मीद थी। भारतीय लेखा मानक के तहत प्रावधान संभावित क्रेडिट नुकसान (ईसीएल) मॉडल पर आधारित होता है, जो मौजूदा चलन के मुकाबले सख्त है। ईसीएल के तहत बैंकोंं को कर्ज के एनपीए बनने से काफी पहले प्रावधान करना होता है, जो डिफॉल्ट की संभावना पर आधारित होता है। इसमें विगत, मौजूदा व भविष्य के संभावित नुकसान का ध्यान रखना होता है। इसके उलट मौजूदा प्रावधान के प्रतिशत आधारित मॉडल में बैंक वास्तविक नुकसान के आधार पर प्रावधान करते हैं। 


इक्रा के प्रमुख (वित्तीय क्षेत्र की रेटिंग) कार्तिक श्रीनिवासन ने कहा, भारतीय लेखा मानक का क्रियान्वयन टलने से निश्चित तौर पर प्रावधान में तत्काल राहत मिलेगी और व बैंकों की पूंजी पर भारतीय लेखा मानक अपनाने के चलते किए जाने वाले अतिरिक्त प्रावधान के हद तक पडऩे वाला दबाव घटेगा।

मौद्रिक नीति अपरिवर्तित रहने से बैंकों का एमटीएम प्रावधान घटेगा। अपरिवर्तित नीतिगत दरें, महंगाई के कम रहने आदि से 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल 16.7 फीसदी फिसल गया। बॉन्ड का प्रतिफल और कीमत का संबंध विपरीत होता है। सरकारी प्रतिभूति में खासा निवेश करने वाले सरकारी बैंकों को सरकारी बॉन्डों की बाजार कीमत में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए तिमाही आधार पर अतिरिक्त प्रावधान करना होता है। पिछली दो तिमाही में सरकारी बैंक ज्यादा प्रावधान से जूझ रहे थे क्योंकि प्रतिफल काफी ज्यादा था।
कीवर्ड बैंकों को मार्क-टु-मार्केट प्रावधान चार तिमाही में फैलाने की अनुमति देने के बाद भारतीय रिजर्व बै,

  
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