आरबीआई के निर्देश से बढ़ी चिंता

अलनूर पीरमोहम्मद, करण चौधरी और अभिजीत लेले | बेंगलूरु/नई दिल्ली/मुंबई Apr 06, 2018 09:47 PM IST

उपयोगकर्ताओं के वित्तीय लेनदेन के आंकड़ों को देश की भौगोलिक सीमा के अंदर अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखे जाने के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देश से भुगतान कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। भले ही इसे लेकर अभी स्थित पूरी तरह स्पष्टï नहीं है कि इन नियमों के दायरे में कौन आएगा और किस तरह के डेटा को देश में सुरक्षित रखे जाने की जरूरत होगी, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि नया दिशा-निर्देश विदेशी कंपनियों को ज्यादा प्रभावित कर सकता है। खासकर इससे वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी कार्ड कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं जो मौजूदा समय में क्रेडिट कार्ड लेनदेन भारत से बाहर भी प्रोसेस करती है और संबंधित डेटा वहां मौजूद रहता है। इससे एमजाईजीएस और साइबरसोर्स जैसे पेमेंट गेटवे भी प्रभावित हो सकते हैं जो मास्टरकार्ड और वीजा के लिए काम करते हैं।

 
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि जो कंपनियां नकदी स्थानांतरण या भुगतान के लिए यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) का इस्तेमाल करती हैं, उन पर भी इसका कुछ असर पड़ सकता है क्योंकि उन्हें कुछ खास ग्राहक डेटा तक पहुंच बनाने की जरूरत होती है, जैसे कौन रकम भेज रहा है, क्योंकि लोग अपने व्हाटï्ïसऐप नंबर या जीमेल को साझा करके सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि उनकी पहुंच लेनदेन से संबंधित आंकड़े तक नहीं है।  व्हाट्ïसऐप (व्हाट्ïसऐप पे), गूगल (गूगल तेज), एमेजॉन (एमेजॉन पे), माइक्रोसॉफ्ट (माइक्रोसॉफ्ट पे) जैसी भुगतान सेवाओं को पेश करने वाली वैश्विक कंपनियां अपने यूजर्स के डेटा को देश से बाहर रखती हैं जबकि भुगतान के डेटा को हमेशा देश में रखा जाता है। इनमें से कई कंपनियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि वे फिलहाल अपना अगला कदम उठाने से पहले इसके प्रभाव की मात्रा का आकलन कर रही हैं। 
 
एमेजॉन इंडिया के एक अधिकारी ने कहा, 'हम आरबीआई नीति का फिलहाल अध्ययन कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'हम आरबीआई द्वारा इस संबंध में जारी किए जाने वाले निर्देशों की समीक्षा करेंगे। फिलहाल इस बारे में बताने के लिए हमारे पास ज्यादा कुछ नहीं है।' भारत में अपनी भुगतान सेवा 'तेज' को हाल में शुरू करने वाली गूगल को अपना संपूर्ण डेटा परिचालन 6 महीने के अंदर देश में स्थानांतरित (यदि इन्हें पहले से ही भारत से नहीं संचालित किया जा रहा हो) करने की जरूरत होगी। वहीं फेसबुक के चैट ऐप द्वारा संचालित व्हाट्ïसऐप पे को बीटा में चलाया  जा रहा है और इसे भी समान समस्या से जूझना होगा। 
 
यूपीआई प्लेटफॉर्म को डिजाइन करने  वाली नैशनल पेमेंट्ïस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के पूर्व मुख्य कार्याधिकारी एवं प्रबंध निदेशक ए पी होता ने कहा, 'हमें अभी गूगल तेज और व्हाट्ïसऐप जैसे प्लेटफॉर्मों पर इन प्रतिबंधों के असर का पूरी तरह से आकलन करने की जरूरत है।'
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