शिखा नहीं चाहतीं पूरा कार्यकाल

बीएस संवाददाता/एजेंसियां | मुंबई Apr 09, 2018 09:56 PM IST

केवल 7 माह के कार्यकाल का किया आग्रह

बोर्ड ने शिखा शर्मा को एमडी व सीईओ के 3 साल के नए कार्यकाल को दी थी मंजूरी
बैंक नियामक से इस प्रस्ताव को अभी तक नहीं मिली थी मंजूरी
बैंक पर एनपीए की जानकारी छिपाने का आरोप

फंसे कर्ज तेजी से बढ़ने तथा प्रणालीगत खामियों के कारण विवादों में रहे ऐक्सिस बैंक की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी शिखा शर्मा ने पद छोड़ने का फैसला कर लिया है। शिखा ने बैंक के निदेशक मंडल से नए कार्यकाल की अवधि 3 साल के बजाय केवल 7 महीने करने का आग्रह किया है, जिसे निदेशक मंडल ने स्वीकार भी कर लिया गया है।  बैंक ने एक नियामकीय जानकारी में कहा कि शिखा ने पत्र लिखकर यह आग्रह किया था। बोर्ड ने चर्चा के बाद उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। इस तरह उनका नया कार्यकाल इस साल 1 जून से 31 दिसंबर तक ही होगा। बहरहाल अभी इस फै सले पर रिजर्व बैंक की मुहर लगनी बाकी है। ऐक्सिस बैंक के एमडी और सीईओ के तौर पर शिखा का तीसरा कार्यकाल 31 मई को खत्म हो रहा है।

ऐक्सिस बैंक ने शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में कहा कि बोर्ड ने पिछले साल 8 दिसंबर को शिखा को फिर से 3 साल के लिए एमडी और सीईओ बनाने का फैसला किया था। उनका यह कार्यकाल 1 जून से शुरू होगा। अलबत्ता उनकी पुनर्नियुक्ति को अभी आरबीआई की मंजूरी नहीं मिली है। बैंक ने कहा कि शिखा ने बोर्ड से अपनी पुनर्नियुक्ति के बारे में पुनर्विचार करने और इसे 1 जून से 31 दिसंबर तक रखने का अनुरोध किया था। बैंक ने यह नहीं बताया कि उन्होंने 3 साल के अपने चौथे कार्यकाल को घटाकर 7 महीने करने का अनुरोध क्यों किया। 

हाल के वर्षों में बैंक का फंसा कर्ज 5 गुना से अधिक बढ़ गया है। मार्च 2015 के अंत में बैंक का सकल एनपीए 4,110 करोड़ रुपये था जो मार्च, 2017 में बढ़कर 21,280 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान बैंक का शुद्ध मुनाफा 7,357.8 करोड़ रुपये से घटकर 3,679.2 करोड़ रुपये रह गया है।

शिखा को जून 2009 में बैंक के चेयरमैन पी जे नायक ने एमडी और सीईओ नियुक्त किया था। उनकी नियुक्ति ऐसे समय की गई जब यूटीआई बैंक का नाम बदलकर ऐक्सिस बैंक किया गया और बोर्ड को लगा कि बैंक को ज्यादा आक्रामकता के साथ कारोबार करना चाहिए। बैंक ने कॉरपोरेट ऋण के रूप में उसने भारी उधार दिया था। 

शिखा का काम बैंक की खुदरा ऋण व्यवस्था को मजबूत करना था। आईसीआईसीआई बैंक में कई वर्षों का अनुभव रखने वाली शिखा ने इस काम को बखूबी अंजाम दिया।  वह 29 वर्षों तक आईसीआईसीआई बैंक से जुड़ी रहीं और दिसंबर में वह ऐक्सिस बैंक में साढ़े नौ साल पूरे कर लेंगी। ऐक्सिस में आने से पहले वह आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस की एमडी और सीईओ थीं। वह आईसीआईसीआई बैंक में शीर्ष पद की दावेदार थी लेकिन जब चंदा कोछड़ को यह जिम्मेदारी मिली तो उन्होंने ऐक्सिस का दामन थाम लिया। लेकिन उनकी नियुक्ति के बाद ऐक्सिस में एक तरह से तूफान आ गया था। बाहरी व्यक्ति की नियुक्ति से नाराज कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बैंक छोड़ दिया। शिखा ने पुरानी टीम को लगभग पूरी तरह बदल दिया और अपनी नई टीम खड़ी की।

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