आईसीआईसीआई बैंक की साख को आरोपों का झटका

अभिजित लेले | मुंबई Apr 09, 2018 10:01 PM IST

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने आज कहा कि भारत के आईसीआईसीआई बैंक के हितों के टकराव वाले कर्ज दिए जाने के आरोप की जांच से बैंक के प्रशासन को लेकर सवाल उठे हैं और इससे उसके साख को खतरा उत्पन्न हो गया है। फिच रेटिंग्स ने एक बयान में कहा है कि बैंक के खिलाफ नियामकीय प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं जो जांच के परिणाम पर निर्भर करेगा। आईसीआईसीआई बैंक के खिलाफ लगाए गए आरोपों का संबंध वीडियोकॉन समूह को दिए गए 50 करोड़ डॉलर के ऋण से है। खबरों के अनुसार, आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोछड़ के पति ने वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तक वेणुगोपाल धूत के साथ मिलकर अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में कारोबार के लिए एक अलग कंपनी बनाई थी। बाद में धूत उस संयुक्त उद्यम से बाहर हो गए। लेकिन ऋण का एक उल्लेखनीय हिस्सा गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बन चुका है।
 
फिच ने कहा है कि बैंक की सीईओ की ऋण समिति की बैठक में मौजूदगी और बैंक की स्वतंत्र जांच में समर्थन देने में रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में कंपनी की परिचालन गतिविधियों की मजबूती को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ है। आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड ने कुछ भी गलती होने से इनकार किया है। बोर्ड ने कहा है कि बैंक के उधारी मानकों के अनुरूप ही वह ऋण आवंटित किया गया था और 20 बैंकों के समूह के हिस्से के तौर पर उसे बढ़ाया गया था। बैंक ने जोर देकर कहा है कि उसने कंसोर्टियम के इतर किसी भी उधारकर्ता समूह को ऋण नहीं दिया। लेकिन ऋण समिति की बैठक में बैंक की सीईओ की मौजूदगी और स्वतंत्र जांच को समर्थन देने में रुचि न होने के कारण बैंक के कंपनी प्रशासन को लेकर संदेह उत्पन्न हो गया है। पिछले महीने बैंक ने यह स्वीकार किया कि चंदा ऋण समिति की बैठक में भाग लेने से स्वयं को अलग नहीं कर सकी जिसमें 3,250 करोड़ रुपये का कर्ज विविध कारोबार से संबद्ध वीडियोकॉन ग्रुप को 2012 में देने का निर्णय किया गया है। 
 
आईसीआईसीआई बैंक के खिलाफ ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब बैंकिंग क्षेत्र में एनपीए का दबाव बढ़ रहा है और कुछ एनपीए का तार ऋण धोखाधड़ी से भी जुड़ रहा है। फिच ने कहा है कि आईसीआईसीआई बैंक जैसे निजी क्षेत्र के बैंकों के बोर्ड में कहीं अधिक योग्य सदस्यों के होने और पेशेवर प्रबंधन के कारण कंपनी प्रशासन आमतौर पर सरकारी बैंकों के मुकाबले बेहतर होता है। कुल मिलाकर निजी क्षेत्र के बैंकों में पारिश्रमिक ढांचा प्रदर्शन केंद्रित होता है जबकि व्यापक एवं विविध निवेशक आधार के कारण बेहतर प्रबंधन जवाबदेही सुनिश्चित होती है। लेकिन यदि जांच में आईसीआईसीआई बैंक में धोखाधड़ी की बात सामने आती है तो यह धारणा प्रभावित होगी।
कीवर्ड ICICI, bank, CBI,

  
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