'एसएमई आसान नियमों के हकदार'

नम्रता आचार्य |  Apr 17, 2018 09:50 PM IST

भारी गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) से जूझ रहा यूको बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सख्त सुधारात्मक कार्रवाई के तहत है। आरबीआई द्वारा एनसीएलटी को भेजी गई प्रमुख चूककर्ताओं की दोनों सूची में बैंक का करीब 90 अरब रुपये का कर्ज फंसा है। दिसंबर तिमाही के दौरान बैंक का शुद्ध घाटा बढ़कर 10.16 अरब रुपये हो गया जबकि कुल फंसे हुए कर्ज का अनुपात बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच गया। यूको बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी आरके टक्कर ने नम्रता आचार्य से बातचीत में कहा कि बड़े मामलों में बोली प्रक्रिया से मौजूदा प्रवर्तकों को दूर रखना सही है लेकिन एसएमई के लिए नियम आसान होने चाहिए। पेश हैं मुख्य अंश:

 
क्या आपको लगता है कि नीरव मोदी घोटाले के लिए किसी प्रावधान की जरूरत है? इस मामले में आपका कुल कितना कर्ज फंसा है?
 
नहीं। जहां तक नीरव मोदी घोटाले का संबंध है तो पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) पहले ही भुगतान कर रहा है और उससे हमें कोई झटका नहीं लगा है। पीएनबी 31 मार्च तक की बकाया रकम का भुगतान पहले ही कर चुका है। लेटर ऑफ क्रेडिट की हमारी कुल रकम करीब 26 अरब रुपये थी।
 
लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) पर प्रतिबंध का क्या प्रभाव रहा? क्या आप अपने विदेशी कारोबार के लिए रणनीति की समीक्षा कर रहे हैं?
 
हमारे बैंक पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ा। हालांकि ट्रेड फाइनैंस, निर्यातकों के मामले में उनके दायित्वों को पूरा करने के लिए विकल्प तलाशना होगा। निर्यातकों के लिए ऋण की लागत बढ़ सकती है। एलओयू हमारे विदेशी कारोबार का एक बड़ा हिस्सा नहीं है लेकिन जाहिर तौर पर वह भी कारोबार का एक हिस्सा है। अब एलसी कारोबार, विदेशी मुद्रा ऋण एवं सिंडिकेशन प्रोडक्ट्ïस पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
 
क्या आप अपने विदेशी कारोबार को अधिक व्यावहारिक बना रहे हैं?
 
हां, हम सिंगापुर और हॉन्ग कॉन्ग की अपनी दोनों शाखाओं को एकीकृत करने का निर्णय पहले ही ले चुके हैं।
 
आरबीआई द्वारा आईबीसी के लिए तैयार डिफॉल्टरों की दोनों सूचियों में आपका कितना ऋण फंसा है? इस प्रकार के ऋण के लिए प्रावधान के नियमों में आबीआई द्वारा दी गई हालिया रियायत के बारे में आप क्या कहेंगे?
 
आरबीआई द्वारा एनसीएलटी को हस्तांतरित डिफॉल्टरों की दोनों सूचियों में हमारा करीब 90 अरब रुपये का ऋण फंसा है। इसलिए हमें 50 फीसदी प्रावधान करना था लेकिन आरबीआई द्वारा नियमों में रियायत दिए जाने के बाद हम 40 फीसदी तक प्रावधान कर सकते हैं। हमें यह करना होगा।
 
इन दोनों सूचियों में शामिल तमाम मामले मुकदमेबाजी में फंसे हुए हैं। क्या आपको लगता है कि प्रवर्तकों को बोली प्रक्रिया में थोड़ी छूट मिलनी चाहिए?
 
एनसीएलटी एक नई अवधारणा है और यह अभी विकास के चरण में है। इसलिए तमाम समस्याएं आ रही हैं। जहां तक मौजूदा प्रवर्तकों को बोली प्रक्रिया से दूर रखने का सवाल है तो मुझे लगता है कि कुछ प्रवर्तकों को दूर रखने का फैसला सही है क्योंकि वही प्रवर्तक फायदा उठाते हैं और कंपनी को नियंत्रित करते हैं लेकिन बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते। ऐसे में हमें कहीं अधिक नुकसान हो रहा है। हालांकि एसएमई के मामले में नए प्रवर्तक को तलाशना कठिन है। ऐसे मामलों में प्रवर्तकों को इरादतन चूककर्ता नहीं कह सकते और इसलिए उन्हें थोड़ी रियायत मिलनी चाहिए ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़ सके।
कीवर्ड NCLT, RBI, NPA, uco bank,

  
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