एनपीए खातों से 48 फीसदी की वसूली बाकी

अद्वैत राव पालेपू | मुंबई Apr 18, 2018 09:46 PM IST

देश में गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) की श्रेणी में रखे गए शीर्ष खातों से बैंक अपने महज 48 फीसदी ऋण ही वसूली पाएंगे। एडलवाइस सिक्योरिटीज की एक अनुसंधान रिपोर्ट में यह बात कही गई है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि जेपी इन्फ्रास्ट्रक्चर, लैंको इन्फ्रास्ट्रक्चर और इरा इन्फ्रास्ट्रक्चर के बकाये को छोड़ दिया जाएग तो इन एनपीए खातों से अपने ऋण की वसूली में प्रमुख बैंकों को करीब 52 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि यह ऋणशोधन प्रक्रिया के तहत दबावग्रस्त खातों के लिए शुरुआती 60 फीसदी नुकसान की उम्मीद से कम है। भूषण स्टील और भूषण पावर ऐंड स्टील के ऋण समाधान से उम्मीद से कहीं अधिक वसूली हुई है। लेकिन उसका एक हिस्सा एमटेक ऑटोमोबाइल्स, इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स और आलोक इंडस्ट्रीज के ऋण समाधान से कम प्राप्तियों में खप गया।
 
बढिय़ा और खराब समाधान
 
भूषण स्टील के मामले में टाटा स्टील 23 मार्च को सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरी थी। कंपनी ने भूषण स्टील के लेनदारों को 348 अरब रुपये के भुगतान और 12 अरब रुपये की परिचालन उधारी की जिम्मेदारी लेने की पेशकश की थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों को अपने 560 अरब रुपये के कॉरपोरेट ऋण पर 37.1 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही बैंकों को कंपनी में 12 फीसदी हिस्सेदारी भी लेनी पड़ेगी। दबावग्रस्त कंपनी इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के लिए वेदांत रिसोर्सेज सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरी है। कंपनी पर 133.45 अरब रुपये की देनदारी है। वेदांत ने इस कंपनी के लिए 50 अरब रुपये के भुगतान की पेशकश की है और नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने पिछले दिनों उसकी समाधान योजना को मंजूरी भी दे दी है। इसमें बैंकों को अपने ऋण की वसूली में 66 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ेगा जिसमें एसबीआई की हिस्सेदारी सबसे अधिक होगी।
 
वेदांत फिलहाल भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की मंजूरी का इंतजार कर रही है जो अगले दो से तीन दिनों में मिलने की उम्मीद है। एडलवाइस की इस रिपोर्ट के लेखक कुणाल शाह, प्रखर अग्रवाल और अभिषेक अग्रवाल के अनुसार, 'हालांकि कुछ बड़े खातों (खासकर इस्पात श्रेणी में) का समाधान अनुमानित मूल्य से अधिक रहा है, लेकिन मैं अन्य क्षेत्रों और छोटे मामलों में ऋण समाधान एवं बैंकों को होने वाले नुकसान को लेकर कहीं अधिक उलझन में हूं।' आरबीआई द्वारा तैयार दूसरी सूची में से छह बड़े एनपीए खातों में सबसे अधिक फंसा हुआ कर्ज एसबीआई का है। इन छह खातों में रुचि सोया इंडस्ट्रीज (23.5 फीसदी), ऑर्किड फार्मा (21.9 फीसदी), कोस्टल प्रोजेक्ट्ïस (29.1 फीसदी), आईवीआरसीएल (7.9 फीसदी), कास्टेक्स टेक्न्नोलॉजिज (20.5 फीसदी) और यूनिटी इन्फ्रा (11.9 फीसदी) शामिल हैं।
 
आईसीआईसीआई बैंक निजी क्षेत्र का एकमात्र ऐसा बैंक है जिसका इन सब खातों में- रुचि सोया इंडस्ट्रीज (6.6 फीसदी), ऑर्किड फार्मा (0.6 फीसदी), कोस्टल प्रोजेक्ट्ïस (14.1 फीसदी), आईवीआरसीएल (11.7 फीसदी), कास्टेक्स टेक्न्नोलॉजिज (3.6 फीसदी) और यूनिटी इन्फ्रा (16.9 फीसदी) शामिल- फंसा हुआ कर्ज है। आरबीआई द्वारा एनसीएलटी को सौंपी गई दूसरी सूची में शामिल 28 से 30 कंपनियों ने अपने बकाये का भुगतान नहीं किया है। करीब 17 खातों में बैंकों का 301.38 अरब रुपये का कर्ज फंसा है लेकिन उन्हें ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता के तहत ऋण समाधान के लिए भेजा जाना अभी बाकी है। इनमें जायसवाल नेको, जय प्रकाश एसोसिएट्ïस, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज, एनार्क एल्युमीनियम, उत्तम गैल्वा स्टील और अबान ऑफशोर शामिल हैं।
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