घर खरीदार बनेंगे वित्तीय ऋणदाता

वीणा मणि | नई दिल्ली Apr 19, 2018 09:48 PM IST

केंद्र सरकार दिवालिया अधिनियम में बदलाव करने के लिए एक और अध्यादेश लाने की तैयारी में है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। विभिन्न पक्षकारों के बीच भेजे गए मसौदा नोट में कहा गया है कि सरकार घर खरीदारों को वित्तीय ऋणदाता का दर्जा देने पर विचार कर रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस नोट को पढ़ा है। दिवालिया कानून समिति की सिफारिशों में से एक सिफारिश यह भी थी। इस मकसद के लिए अंतरमंत्रालयी सलाह के लिए एक मसौदा कैबिनेट नोट भी भेजा गया है।  सूत्रों ने यह भी कहा है कि कानून समिति की सलाह के मुताबिक सरकार दिवालिया कानून में धारा 29ए लाने पर विचार कर रही है, जो कम कड़ा होगा। कंपनी के साथ सीधे जुड़े होने वाले लोगों पर प्रतिबंध तक यह सीमित होगा। इसमें वित्तीय फर्मों को संबंधित पक्ष के रूप में नहीं देखा जाएगा। 
 
सरकार ने अपने हाल के पिछले अध्यादेश में गैर निष्पादित संपत्तियों वाले प्रमोटरों पर एक साल से ज्यादा समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया था, जिनमेंं जान बूझकर चूक करने वाले और दिवालिया प्रक्रिया के दौरान समाधान योजना पेश करने के समय तक जुड़े लोग शामिल होंगे। सरकार ने यह कवायद इसलिए की थी कि दिवालिया समाधान में शामिल कंपनियों के प्रमोटर कंपनी पर फिर से नियंत्रण हासिल न कर सकें।  इसके अलावा जिस अध्यादेश की योजना है, उसमें मझोली और छोटी कंपनियों के लिए अलग ढांचे का प्रावधान किया गया है। आकलन से पता चलता है कि करीब 70 प्रतिशत कंपनियां सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) हैं। 
 
दिवालिया एवं दिवाला अधिनियम में संशोधन में बदलाव पर विचार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के महत्त्वपूर्ण सुझावों में से एक सुझाव यह भी था कि अधिनियम में उल्लिखित फास्ट ट्रैक दिवालिया प्रावधानों को वापस लिया जाना चाहिए। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एफ-सीआरआईपी (फास्ट ट्रैक इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रॉसेस) छोटे कर्जदारों के लिए सीआरआईपी के सरल करने के उद्देश्य को पूरा नहींं करते।  फास्ट ट्रैक दिवालिया प्रावधान इसलिए अधिसूचित किया गया था कि स्टार्टअप को आराम से बाहर निकलने में मदद मिल सके। फास्ट ट्रैक समाधान से कंपनी की अधिस्थगन की अवधि घटकर 90 दिन हो गई है, जो पहले 180 दिन थी।  समिति ने यह भी सिफारिश की है कि कंपनी के लेनदारों की समिति (सीओसी) यह फैसला करे कि राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) द्वारा याचिका स्वीकार करने के बाद दिवालिया समाधान का आवेदन वापस लिया जा सकता है।  इस समय सरकार आने वाले अध्यादेश में सिर्फ घर के खरीदारों और धारा 29ए में संशोधन के मसले पर विचार कर रही है। 
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