बैंक घोटालों से हिला बुनियादी ढांचा

अमृता पिल्लई | मुंबई Apr 19, 2018 09:50 PM IST

बैंक धोखाखड़ी की लगातार चल रही खबरों और इसकी जांच से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मिलने वाले कर्ज पर असर पड़ा है। इस क्षेत्र में दिवालिया से जुड़े कई मामलोंं की वजह से दिक्कत बढ़ी है और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़े कर्ज बकाये पर नया कर्ज दिए जाने में बहुत ज्यादा सावधानी बरती जा रही है।  परियोजनाओं की फाइनैंशियल क्लोजर की पूरी प्रक्रिया सुस्त पड़ जाने की संभावना है, जो सरकार के महत्त्वाकांक्षी विकास उद्देश्यों को देखते हुए एक समस्या है। लार्सन ऐंड टुब्रो के मुख्य वित्तीय अधिकारी आर शंकर रमन ने कहा, 'कर्ज देने वाली एजेंसियों का जोखिम उठाने का माद्दा निश्चित रूप से खत्म हो गया है। बहरहाल मेरा मानना है कि व्यावहारिक परियोजनाओं को कर्ज मिलना जारी रहेगा।' उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बुनियादी ढांचा क्षेत्र में परियोजनाओं के आवंटन में सुधार होने से ऋण प्रवाह में मदद मिलेगी। 
 
2017-18 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 7,400 किलोमीटर सड़क परियोजनाओं का आवंटन किया, जिस पर अनुमानित लागत 1.2 लाख करोड़ रुपये है। यह अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है। सरकार की ओर से वित्तपोषित लेकिन बुनियादी ढांचा कंपनियों को आवंटित इन परियोजनाओं को अभी बैंक गारंटी की जरूरत है, जिससे इन परियोजनाओं को हासिल और उन्हें लागू किया जा सके।  रेटिंग एजेंसी इक्रा के उपाध्यक्ष शुभम जैन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की राह में बाधाएं आएंगी। उन्होंंने कहा, 'हर स्तर पर बैंक गारंटी की जरूरत है। बोली में, उसके बाद प्रदर्शन गारंटी में इसकी इसकी जरूरत होती है। उसके बाद आपको परियोजना के लिए मोबिलाइजेशन एडवांस की जरूरत होती है तो उसके लिए भी गारंटी जरूरी है। यहीं पर हम समस्या पाते हैं, क्योंकि बैंक नया गारंटी जारी करने के लिए अतिरिक्त जमानत की मांग कर रहे हैं। यह एक अप्रत्यक्ष असर है, जहां बैंक खुद अपने मसलों से जूझ रहे हैं और अब कर्ज देने में अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।'
 
परियोजना को समय से पूरा होने के लिए फाइनैंशियल क्लोजर जल्द होना जरूरी है। इस पर भी असर पड़ रहा है। एक निवेश बैंकर ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'पूरी प्रक्रिया सुस्त पड़ गई है। इसके पहले अगर कर्ज के लिए पूरा समझौता होता था तो 3 से 6 महीने लगते थे। अब इसमें 9 से 12 महीने लगेंगे। कुछ परियोजनाएं ऐसी होंगी, जिनके लिए समझौते नहीं हो पाएंगे।'  उन्होंने कहा, 'बैंक हर तरह की सावधानी बरत रहे हैं। अब इन घोटालों की वजह से गैर निष्पादित संपत्तियां (एनपीए) आगे और बढ़ेंगी। इससे बुनियादी ढांचा क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज पर और असर पड़ेगा क्योंकि बैंक इस तरह के मुश्किल क्षेत्रों को कर्ज देने को अनिच्छुक होंगे।'
 
क्या बैंकों के पास विकल्प हैं, यह पूछे जाने पर बैंकर ने कहा, 'अगर उपकरण आयातित हैं तो विदेशी वित्तपोषण का विकल्प है। गैर बैंक वित्त कंपनियां एक और विकल्प हैं, लेकिन वे बॉन्ड बाजार में नहीं जा सकतीं। कुल मिलाकर ये सीमित विकल्प हैं। बैंको का कर्ज महत्त्वपूर्ण है।' 
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