जाली नोट, संदिग्ध लेनदेन बढ़े

भाषा |  Apr 20, 2018 11:18 PM IST

नोटबंदी के बाद देश के बैंकों को सबसे अधिक मात्रा में जाली नोट मिले, वहीं इस दौरान संदिग्ध लेनदेन में 480 प्रतिशत से भी अधिक का इजाफा हुआ। 2016 के अंत में नोटबंदी के बाद संदिग्ध जमाओं पर आई पहली रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अलावा सहकारी बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों में सामूहिक रूप से 400 प्रतिशत अधिक संदिग्ध लेनदेन सूचित किए गए। इस लिहाज से 2016-17 में कुल मिलाकर 4.73 लाख से भी अधिक संदिग्ध लेनदेन की सूचनाएं प्रेषित की गईं। वित्तीय आसूचना इकाई (एफआईयू) के अनुसार बैंकिंग और अन्य आर्थिक चैनलों में 2016-17 में जाली मुद्रा लेनदेन के मामलों में पिछले साल की तुलना में 3.22 लाख का इजाफा हुआ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर, 2016 को 500 और 1,000 के नोटों को बंद करने की घोषणा से जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि जाली मुद्रा रिपोर्ट (सीसीआर) की संख्या 2015-16 के 4.10 लाख से बढ़कर 2016-17 में 7.33 लाख पर पहुंच गई। यह सीसीआर का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। पहली बार सीसीआर 2008-09 में निकाला गया था। सीसीआर लेनदेन आधारित रिपोर्ट होती है और जाली नोट का पता चलने पर ही सामने आती है।

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