मुद्रा बाजार में रिजर्व बैंक का हस्तक्षेप

अनूप रॉय | मुंबई Apr 29, 2018 09:58 PM IST

जीएसटी नेटवर्क ने सरकार की उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। इस समय जीएसटीएन को सरकारी कंपनी के रूप मेंं बदले जाने की सुगबुगाहट के बीच इसकेसीईओ प्रकाश कुमार ने दिलाशा सेठ से बातचीत में कहा कि नेटवर्क के ढांचे पर फैसला करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। संपादित अंश 

 
पिछले एक साल को आप किस रूप में देखते हैं?
 
जीएसटी पोर्टल को एक साल पांच महीने पूरे हो चुके हैं। यह उत्साहजनक और चुनौतीपूर्ण समय रहा है। 
 
क्या अभी दरों और कानून में और बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं, जैसा कि हम पहले ही देख चुके हैं? 
 
अगर यह कहा जाए कि हमें इसके बारे में जानकारी नहीं थी तो यह गलत होगा। हम इसके बारे में जानते थे और उसे लागू करने के लिए तैयार थे। जब भी किसी नए कानून का मसौदा बनता है तो उसमें कुछ खामियां होती हैं, जिसे लागू किए जाने के दौरान दुरुस्त किया जाता है। साथ की न्यायालय व संबंधित प्राधिकारियों के आदेश भी होते हैं। भारत जैसे संघीय ढांचे के लिए जीएसटी पूरी तरह से नई अवधारणा थी, जहां सभी अप्रत्यक्ष करों का प्रशासन केंद्र स्तर, राज्य स्तर पर या दोनोंं द्वारा किया जाता है। 
 
क्या तेजी से होने वाला बदलाव आपके लिए झटका था?
 
अगर दरों में बदलाव होता है तो उसका सिस्टमपर कोई असर नहीं होता क्योंकि उसे बाहर रखा गया है। हमें पिछले अनुभव से पता था कि दरोंं का समायोजन होता है। और किसी भी नए कानून की तरह इसे भी स्थिर होने में वक्त लगेगा। ऐसे में हमने इसे बाहर रखा। बहरहाल अन्य चीजोंं जैसे फॉर्म में बदलाव का असर पड़ा। 
 
सरकार ने हमेशा प्राइवेट जीएसटीएन के विचार का समर्थन किया। अब इसे सरकारी निकाय बनाने की बात क्यों हो रही है?
 
मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। सरकार ने जीएसटीएन का सृजन निजी निकाय के रूप में किया और शायद अब व इसे सरकारी निकाय में बदलना चाहती हो। यह अच्छा है। यह सरकार के अधिकार  क्षेत्र में है। 
 
क्या आपसे इस मसले पर वित्त मंत्रालय से बात हुई है?
 
इस सिलसिले में कोई बातचीत नहीं हुई है। मैं इस मसले पर तभी प्रतिक्रिया दे सकता हूं जब हमारे सामने कुछ आए। इसके अलावा मेरे अधिकार क्षेत्र में कुछ नहीं है। सरकार ने एक ढांचा बनाया था और अब वह इसमें बदलाव करना चाहती है, यह ठीक है। 
 
खरीद व वेतन के बारे में क्या कहेंगे?
 
हम सरकार की खरीद के साधनों का इस्तेमाल करते हैं। हमारी ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षण द्वारा की जाती है। हम सूचना के अधिकार के दायरे में हैं। हमारी हायरिंग और फायरिंग नीति में सिर्फ एक अंतर है कि हम निजी क्षेत्र जैसे हैं। हमारे वेतन का ढांचा निजी क्षेत्र जैसा है। लेकिन इससे हमें बेहतर लोगों को भर्ती करने की सुविधा मिलती है। 
 
मतलब जीएसटीएन में हायरिंग ऐंड फायरिंग तेज प्रक्रिया है?
 
हां। हमारे और सरकार की कंपनी के बीच अंतर हायर ऐंड फायर नीति से संबंधित है। लोगों की भर्तियां एक  प्रक्रिया के माध्यम से होती है, जिसमेंं बोर्ड द्वारा स्क्रीनिंग शामिल है। हटाया जाना कम है। अगर आप बेहतर प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं तो हम सुधार का मौका देते हैं। अगर प्रदर्शन में सुधार कार्यक्रम काम नहीं करता है तो बाहर किया जाता है। 
 
क्या किसी को निकाला गया है?
 
हां पिछले 18 महीने में 4 को निकाला गया है। लेकिन मैंं इस बात को कहना चाहता हूं कि ढांचे के बारे में फैसला करना सरकार का विशेषाधिकार है। इससे हमें बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिला और हम लक्ष्य हासिल करने में कामयाब रहे। इसके अलावा मुझे नहीं लगता कि सरकार कोई ऐसा फैसला करेगी जिससे जीएसटीएन निकाय पूरी तरह से उलट जाए। 
 
रिटर्न फाइल सरल करने की उम्मीद की जा रही है ऐसे में क्या आपको लगता है कि मौजूदा व्यवस्था बेहतर है, जो स्थिर हो गई है? 
 
यह नीतिगत मसला है जिस पर सिर्फ परिषद फैसला कर सकती है। लेकिन उन्हें नई व्यवस्था लागू करने के लिए हमें समय देना होगा। उद्योग और जीएसटी सुविधा को भी समय देने की जरूरत होगी। 
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