निजी बैंकों की मुफ्त सेवा पर कर नहीं लेगी सरकार

सोमेश झा और दिलाशा सेठ | नई दिल्ली May 09, 2018 09:53 PM IST

नोटिस में नि:शुल्क सेवाओं पर की गई है कर भुगतान की मांग
वित्त मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद नोटिस लिया जा सकता है वापस

कर विभाग निजी बैंकों को जारी 'कारण बताओ' नोटिस वापस ले सकता है। इस नोटिस में विभाग ने इन निजी बैंकों को ग्राहकों को दी गई नि:शुल्क सेवाओं पर कर भुगतान करने के लिए कहा है। अब इस मामले में वित्त मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद यह नोटिस संभवत: वापस ले लिया जाएगा।  वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने वित्त मंत्रालय में राजस्व विभाग को इस मामले से अवगत कराया है।

डीएफएस ने उन बैंकों के विचार से भी राजस्व विभाग को अवगत कराया है, जिन्होंने कारण बताओ नोटिस का विरोध किया है। इस बारे में वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'हमने राजस्व विभाग से बात की है और उनसे यह मामला आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया है। इस मामले का हल निकल जाएगा और मामला आगे नहीं बढ़ेगा।'

वस्तु एवं सेवा कर खुफि या महानिदेशालय (डीजीजीएसटीआई) के कुछ कार्यालयों ने आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, ऐक्सिस बैंक सहित कुछ सरकारी बैंकों जैसे भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। नोटिस में इन बैंकों को सेवा कर पर जुर्माना एवं ब्याज का भुगतान करने के लिए कहा था। इन बैंकों ने जुलाई 2012 से जून 2017 तक पांच सालों के लिए सेवा का भुगतान नहीं किया था।

वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि जब वित्त मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया, उस समय डीजीजीएसटीआई दूसरे बैंकों को भी ऐसे नोटिस भेजने वाला था। हरेक बैंक ग्राहकों को विभिन्न श्रेणी के न्यूनतम रकम की पेशकश करते हैं। इनके आधार पर कुछ 'नि:शुल्क सेवाएं' दी जाती हैं।

उन ग्राहकों के लिए कर की मांग की गई थी, जो कुछ नि:शुल्क सेवाओं का लाभ लेकर न्यूनतम रकम खाते में रख रहे थे। इन नि:शुल्क सेवाओं में एटीएम से सीमित संख्या में नकद निकासी, चेक बुक, खाता विवरण, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, पिन बदलना आदि शामिल थे।

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