'वेतन पर हस्तक्षेप करे केंद्र'

नम्रता आचार्य | कोलकाता May 09, 2018 10:02 PM IST

वेतन में बढ़ोतरी को लेकर इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) का प्रस्ताव खारिज करने के बाद बैंक यूनियनों ने इस मसले पर सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। यूनियनों ने सरकार की प्रतिक्रिया के लिए 12 मई तक की तिथि तय की है। आईबीए ने वेतन में 2 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया है।  वेतन में बढ़ोतरी को लेकर 11वें द्विपक्षीय समझौते को लागू करने का मतलब है कि बैंकों को भारी खर्च करना पड़ेगा, जो बहुत ज्यादा गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) के संकट से जूझ रहे हैं। आल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन के महासचिव डीटी फ्रैंको ने कहा कि अगर वेतन में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो बैंकोंं पर करीब 500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा, जबकि यूनियनों ने जो प्रस्ताव दिया है, उसे लागू करने पर करीब 12,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

 
पिछली बार 2012 में वेतन में बदलाव हुआ था तो कर्मचारियों का वेतन 15 प्रतिशत बढ़ा था। फ्रैंको ने कहा कि इससे बैंकों पर करीब 8,300 करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था। आल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोशिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा, 'पिछले 4 से 5 साल में बैंक परिचालन मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन खराब कर्ज की वजह से शुद्ध मुनाफा खत्म हो गया है। ऐसे में हमने आईबीए द्वारा 2 प्रतिशत वेतन वृद्धि के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। अब हमने अपना मांग पत्र वित्तमंत्री को सौंपा है।'   यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन ने कहा है कि बैंक कर्मचारियों को वेतन भुगतान के मामले में केंद्र सरकार के कर्मचारियों से समानता रखी जानी चाहिए।
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