एनपीए प्रावधान के लिए मंत्रालय के नए उपाय

एजेंसियां | नई दिल्ली May 13, 2018 09:39 PM IST

वसूल न होने वाले ऋण पर नुकसान दिखाने के नियम के कारण बैंकों के परिचालन लाभ और उनकी ऋण देने की क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है। बैंकों को इस स्थिति से उबारने के लिए वित्त मंत्रालय उन्हें विशेष बॉन्ड जारी करने के नए उपाय पर विचार कर रहा है। समझा जाता है कि डूबते ऋण यानी गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के लिए प्रोविजन शोर-अप सर्टिफिकेट्ïस (पीएससी) जारी करने से बैंकों के परिचालन लाभ को बचाने में मदद मिलेगी और उनके बहीखाते की हालत अच्छी दिखेगी। इससे बैंक ऋण देने के कारोबार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
 
सूत्रों ने कहा कि इस योजना के तहत बैंकों को उनके एनपीए संबंधी प्रावधान के बराबर पीएससी दिए जाएंगे और उनकी पूंजी का स्तर बना रहेगा। सूत्रों ने कहा कि इस योजना के विभिन्न पहलुओं पर अभी विचार चल रहा है। देश में सभी बैंकों सकल एनपीए गत 31 दिसंबर को 8,40,958 करोड़ रुपये था। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा सरकारी बैंकों का था।  ऊंचे एनपीए और उसके कारण नुकसान के भारी प्रावधान के चलते बैंकों के लाभ में भारी गिरावट हुई या वे घाटे में आ गए है। इससे उनकी पूंजी और ऋण देने की क्षमता प्रभावित हो रही है। पिछले दिसंबर के अंत में देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक का सकल एनपीए 2,01,560 करोड़ रुपये था।
 
उद्योग जगत में डूबते ऋण के कारण 31 दिसंबर 2017 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल एनपीए 6,09,222 करोड़ रुपये था जो सकल अग्रिम का 20.41 फीसदी है। इसके बाद 1,10,520 करोड़ रुपये (5.77 फीसदी) के साथ सेवा क्षेत्र दूसरे पायदान पर, 69,600 करोड़ रुपये (6.53 फीसदी) के साथ कृषि एवं सहायक सेवाएं, 14,986 करोड़ रुपये के साथ गैर-खाद्य ऋण और 36,630 करोड़ रुपये (2.01 फीसदी) के साथ खुदरा ऋण का स्थान रहा।
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