छोटे कारोबार-रियल्टी को एनबीएफसी का सहारा

सुशील मिश्र | मुंबई May 15, 2018 10:02 PM IST

वित्त वर्ष 2017-18 की विदाई से पहले नीरव मोदी कांड ने बैंकों को पूरी तरह से हिला दिया। अब बैंक कर्ज देने में ज्यादा सतर्कता दिखा रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फिलहाल रत्न एवं आभूषण और रियल्टी सेक्टर से दूरी बनाए हुए हैं। गैर निष्पादित परिसंपति (एनपीए) के बढ़ते बोझ से परेशान बैंकों ने कर्ज बांटने में सख्ती और नियम कायदों की लाइन चौड़ी कर दी, जिसका सीधा फायदा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को मिल रहा है। अप्रैल महीने में एनबीएफसी के कारोबार में 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
 
बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि पिछले साल के मुताबिक इस साल एनबीएफसी के कारोबार में औसतन 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जबकि पिछले एक महीने में कारोबार में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एडलवाइस के अध्यक्ष अनिल कोथुरी कहते हैं कि सार्वजनिक बैकों से निराश लोग एनबीएफसी की तरफ आ रहे हैं।  सार्वजनिक बैंक कागजी नियम कायदों पर चलते हैं जबकि एनबीएफसी जमीनी हकीकत दे रहे हैं, हम उन लोगों को भी कर्ज देते हैं जिनका पहले से बैंकिंग रिकॉर्ड मजबूत नहीं है या फिर नहीं है। कर्ज देते वक्त देखा जाता है कि ये जो कर्ज ले रहा है वह वापस कर पाएगा या नहीं। जैसे टैक्स वाले या फिर सब्जी विक्रेता के पास कुछ कागजों की कमी होती है लेकिन वह कर्ज चुकाने में सक्षम होता है। रियल्टी सेक्टर बुरे दौर से गुजर रहा है, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक छोटे बिल्डरों को कर्ज देने में आनाकानी करते हैं जबकि एनबीएफसी कर्ज दे रहे हैं लेकिन कर्ज देते समय उनसे गारंटी में कुछ संपति बैंक अपने पास रख लेते हैं जिससे कर्ज डूबने की संभावना बहुत कम हो जाती है। 
 
कर्ज मुहैया करने में मदद करने वाली कंपनी लोन एक्सप्रेस के प्रबंध निदेशक प्रताप सिंह कहते हैं कि सार्वजनिक और निजी बैंक रियल्टी और आभूषण क्षेत्र को कर्ज देने में अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं, ऐसे में कर्ज लेने वालों को एनबीएफसी का ही सहारा है। हालांकि एनबीएफसी की रियल्टी क्षेत्र से जुड़ी गैर निष्पादित परिसंपति (एनपीए) में 2018 में वृद्धि  होगी जिससे कुछ एनबीएफसी कंपनियां और निजी ऋणदाता छोटी रियल्टी कंपनियों पर बड़ी कंपनियों में विलय का भी दबाव डालने की रणनीति तैयार कर रही हैं। गौरलतब है कि एक हालिया रिपोर्ट केअनुसार रियल्टी क्षेत्र के कुल 4,000 अरब रुपये के ऋण में एनबीएफसी और संपत्ति बंधक वित्तीय संस्थानों का कर्ज हिस्सा 2,200 अरब रुपये का है। यह वाणिज्यिक बैंकों के 1,800 अरब रुपये की तुलना में काफी अधिक है। 
 
बैंकों द्वारा किए जा रहे भेदभाव पर हीरा कंपनी डायमंड नाइन के चेयरमैन संजय शाह कहते हैं कि छोटे कारोबारी को कर्ज नहीं दिया जा रहा है जबकि अभी भी बड़ी कंपनियां बैकों को प्यारी लग रही है जबकि छोटे कारोबारी भागने वाले नहीं है और बैंकों का कर्ज वापस करने में सबसे आगे हैं। रियल्टी और आभूषण क्षेत्र में पकड़ रखने वाले हार्दिक हुंडिया कहते हैं कि बड़े बैंक कागजात देखकर कर्ज दे देते हैं जबकि एनबीएफसी जमीनी हकीकत पर कर्ज दे रहे हैं, यह जरुरी नहीं है कि कागज में अच्छी दिखने वाली कंपनी ईमानदार ही हो जबकि बहुत सारे छोटे कारोबारी कागजीतौर पर कमजोर होते हैं लेकिन कर्ज वापसी में ईमानदार साबित होते हैं।
 
कर्ज मांगने वालों की बढ़ती संख्या को एनबीएफसी अपने लिए बेहतरीन मौका मान रहे हैं। एडलवाइस के अध्यक्ष अनिल कोथुरी के मुताबिक सार्वजनिक बैंकों की अपेक्षा एनबीएफसी की पहुंच बहुत सीमित है जो तेजी से बढ़ रही है। एडलवाइस की फिलहाल 120 शाखा हैं जिन्हें अगले 18 महीनों में बढ़ाकर 200 कर दिया जाएगा।  राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में नई शाखाएं खोली जाएगी। महाराष्ट्र में फिलहाल एडलवाइस की कुल 15 शाखाएं हैं अगले 18 महीनों में ये बढ़कर 30 हो जाएंगी। आधार हाउसिंग फाइनैंस के प्रबंध निदेशक देव शंकर त्रिपाठी कहते हैं कि 2017-18 में हमारे कारोबार में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सबके लिए घर की अवधारणा के तहत हमने 75,000 नए लोगों को कर्ज दिया लेकिन बैंक का एनपीए पहले जैसा 0.5 फीसदी में बना हुआ है। त्रिपाठी के मुताबिक छोटे और गरीब लोग कर्ज ज्यादा ईमानदारी से वापस करते हैं। 
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