चौथी तिमाही में भी घाटा दर्ज करेगा भारतीय स्टेट बैंक

श्रीपद एस ऑटे | मुंबई May 21, 2018 09:39 PM IST

भारतीय स्टेट बैंक मार्च तिमाही में 20.76 अरब रुपये का नुकसान दर्ज कर सकता है और बैंक मंगलवार को नतीजे पेश करेगा। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों से ये संकेत मिले। देश के सबसे बड़े बैंक के लिए यह नुकसान वाली लगातार दूसरी तिमाही होगी। एसबीआई ने दिसंबर तिमाही में 19 साल में पहली बार 24.16 अरब रुपये का नुकसान दर्ज किया था क्योंकि आरबीआई ने बैंक को 230 अरब रुपये से ज्यादा कर्ज को एनपीए के तौर पर पुनवर्गीकृत करने को कहा था, वहीं निवेश पर हुए ह्रïास के लिए प्रावधान से भी बैंक के मुनाफे पर असर पड़ा।
 
फंसे कर्ज में बढ़ोतरी और प्रतिफल में काफी ज्यादा बढ़ोतरी से सरकारी बॉन्डों में निवेश पर मार्क टु मार्केट नुकसान के चलते उच्च प्रावधान से एसबीआई के मुनाफे पर वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में असर पड़ेगा। विश्लेषकों का हालांकि मानना है कि एसबीआई ने मार्क टु मार्केट प्रावधान को तिमाहियों में फैलाने की अनुमति का इस्तेमाल का इस्तेमाल किया होगा, इस वजह से कुछ हद तक नुकसान पर लगाम कसी गई होगी। ऐक्सिस कैपिटल के विश्लेषकों ने नतीजे से पहले समीक्षा रिपोर्ट में कहा, बैंक एमटीएम प्रावधानों के पलटाव का इस्तेमाल कुल प्रावधान में इजाफे में कर सकता है। इसी तरह एनसीएलटी के खातों के लिए आरबीआई की तरफ से 50 फीसदी के बजाय 40 फीसदी के प्रावधान की अनुमति से भी बैंक को लाभ मिलेगा, अगर एसबीआई इसका इस्तेमाल करने का फैसला लेता है। अन्यथा नुकसान अनुमान के मुकाबले ज्यादा हो सकता है।
 
चौथी तिमाही के नतीजे घोषित करने वाले अन्य सरकारी बैंकों में पाया गया है कि आरबीआई के नए एनपीए ढांचे से उनके लाभ पर असर पड़ा। एसबीआई के पास दिसंबर 2017 में दबाव वाली मानक परिसंपत्तियों का 208.8 अरब रुपये का कोष था, जो इसकी कुल उधारी के एक फीसदी से भी ज्यादा है। इस तरह से सकल एनपीए इसकी सकल उधारी का 11.5 फीसदी हो सकता है, जो दिसंबर तिमाही में 10.4 फीसदी रहा था। यह विश्लेषकों का मानना है। ज्यादा फंसे कर्ज से बैंक का राजस्व भी प्रभावित होगा। इसके साथ ही उधारी में सुस्त बढ़ोतरी से शुद्ध ब्याज आय साल दर साल के हिसाब से 8-9 फीसदी घट सकती है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने एक रिपोर्ट में कहा, इसकी शुद्ध ब्याज आय क्रमिक तौर पर स्थिर रह सकती है। संपत्ति की गुणवत्ता, उधारी में बढ़त और एनसीएलटी के मामले कुछ ऐसे विषय हैं जिस पर बाजार की नजर रहेगी। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में उधारी और नए एनपीए दिशानिर्देश के असर पर भी नजर डालनी होगी। अभी विश्लेषकों का कहना है कि अगर बैंक वित्त वर्ष 2019 में फंसा कर्ज 420 अरब रुपये रहने के अपने पूर्व के अनुमान को दोहराता है तो इसे सकारात्मक माना जाएगा।
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