एसबीआई को रिकॉर्ड घाटा

अभिजित लेले | मुंबई May 22, 2018 09:39 PM IST

संपत्तियों की गुणवत्ता में गिरावट और फंसे कर्ज के लिए ऊंचा प्रावधान करने के कारण भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को मार्च में समाप्त चौथी तिमाही में 77.18 अरब रुपये का शुद्घ घाटा हुआ है। यह देश के सबसे बड़े बैंक को किसी तिमाही में हुआ अब तक का सबसे बड़ा घाटा है। निवेश आय में कमी, वेतन संशोधन के लिए ऊंचे प्रावधान और ग्रेच्युटी की सीमा बढऩे से भी बैंक का घाटा बढ़ा है।  

एसबीआई को वित्त वर्ष 2017-18 की लगातार दूसरी तिमाही में घाटा हुआ है। दिसंबर 2017 में खत्म हुई तीसरी तिमाही में भी इस सार्वजनिक बैंक को 24.16 अरब रुपये का घाटा हुआ था। वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में बैंक को 28.14 अरब रुपये का मुनाफा हुआ था लेकिन उसमें एसबीआई के सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का लेखा-जोखा शामिल नहीं था।

इन सहयोगी बैंकों एवं महिला बैंक का एक अप्रैल 2017 को एसबीआई में विलय हुआ था। विलय के बाद मार्च 2017 तिमाही के लिए एसबीआई का संशोधित घाटा 34.42 अरब रुपये था। अगर मार्च 2018 तिमाही में भी बैंक को 45 अरब रुपये की कर देनदारी वापस नहीं हुई होती तो उसका घाटा और अधिक रहता। वित्त वर्ष 2017-18 की पूरी अवधि में एसबीआई का शुद्घ घाटा 65.47 अरब रुपये रहा जबकि वर्ष 2016-17 में बैंक को 104.84 अरब रुपये का वार्षिक शुद्घ लाभ हुआ था।

अगर विलय का समायोजन किया जाए तो एसबीआई को वित्त वर्ष 2016-17 में 18.05 अरब रुपये का शुद्घ घाटा हुआ रहता।  एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 भारतीय बैंकिंग उद्योग के लिए मुश्किल भरा साल रहा और एसबीआई भी इसका अपवाद नहीं है। 2017-18 के आंकड़े मूल बैंक और इसमें विलय किए गए बैंकों का संयुक्त प्रदर्शन दिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि बैंक ने चौथी तिमाही में बॉन्ड निवेश पर हुए मार्क-टू-मार्केट नुकसान के लिए एकबारगी प्रावधान किया है और इसे चार तिमाहियों में विस्तारित नहीं करने का फैसला किया है। चौथी तिमाही में बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में और गिरावट देखी गई, क्योंकि इसे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्देशानुसार कुछ परिसंपत्तियों के वर्गीकरण में बदलाव करना पड़ा।

आरबीआई ने 12 फरवरी को एक आदेश जारी कर रणनीतिक कर्ज पुनर्संरचना (एसडीआर) सहित विभिन्न पुनर्गठन प्रक्रिया (रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम) समाप्त कर दी थी। इससे एनपीए के लिए प्रावधान चौथी तिमाही में दोगुना से भी अधिक बढ़कर 240.80 अरब रुपये हो गया। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 193.23 अरब रुपये रहा था। आलोच्य तिमाही में सकल एनपीए अनुपात 10.91 प्रतिशत रहा, जो एक साल पहले 9.11 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 10.35 प्रतिशत रहा था।

एसबीआई का सकल एनपीए 2.23 लाख करोड़ रहा। दिसंबर तिमाही में यह आंकड़ा 1.99 लाख करोड़ रुपये रहा था। इससे साफ संकेत मिलता है कि आलोच्य तिमाही में बैंक को परिसंपत्तियों पर करीब 242.86 अरब रुपये का जोखिम उठाना पड़ा। 

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