बैंक पेश करेंगे पुनरुद्धार योजना

नम्रता आचार्य | कोलकाता May 22, 2018 09:49 PM IST

केंद्र सरकार द्वारा 11 सरकारी बैंकों को तत्काल सुधार के कदम (पीसीए) के तहत पुनरुद्धार योजना पेश करने के दिशानिर्देश के बाद बैंक शुक्रवार को अपना प्रस्ताव पेश करने जा रहे हैं। इन प्रस्तावों में कॉर्पोरेट कर्ज आगे और कम किया जाना, खुदरा पर ध्यान केंद्रित करना, सूक्ष्म, लघु और मझोली इकाइयों व कृषि क्षेत्र को कर्ज बढ़ाने और वसूली सख्त करने की योजना शामिल है।  ज्यादातर बैंकों ने पहले ही अपना कॉर्पोरेट कर्ज कम कर दिया है, जबकि खुदरा कर्ज बढ़ा दिया है।  केंद्रीय वित्त मंत्री पीयूष गोयल के साथ पिछले सप्ताह हुई बैठक के बाद बैंकों ने पीसीए मानकों में ढील का मसला उठाया था। इसमें कर्ज देने के मानकों में ढील देने, खासकर ज्यादा जोखिम वाली संपत्तियों (आरडब्ल्यूए) का मसला शामिल है। 

 
बैंकों ने राज्य सरकारों से भी सहयोग की मांग की है, जिससे वित्तीय संपत्तियों के प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण और प्रतिभूति ब्याज लागू करने का अधिनियम 2002 लागू किया जा सके, जिसे सरफेसी ऐक्ट के नाम से भी जाना जाता है।  सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के बैंंकर ने कहा, 'आरडब्ल्यूए के मसले पर चर्चा हुई थी। ज्यादातर बैंकों का मानना था कि अगर आरडब्ल्यूए पर सीमाएं कम कर दी जाएं तो बैंकों को और आमदनी होगी, जिसे मुनाफे में बदला जा सकेगा। इसके अलावा बैंकों ने वसूली के लिए राज्यों से सहयोग की भी मांग की थी क्योंकि संपत्ति पर कब्जा करन के लिए जिलाधिकारी की अनुमति की जरूरत होती है, जिसमें बहुत ज्यादा समय लग जाता है।'
 
बैंक राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) के तहत भी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। दिवाला एवं दिवालिया संहिता के तहत भूषण स्टील के मामले के निपटारे से ही करीब 7,500 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। उदारहण के लिए बैंक आफ इंडिया के मामले में, जो पीसीए के तहत है, भूषण स्टील से करीब 2,000 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। वहीं मुख्य कार्यकारी अधिकारी व प्रबंध निदेशक पवन बजाज के मुताबिक यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया के मामले में शुद्ध लाभ 100 करोड़ रुपये होगे।
 
इसके पहले सरकार ने कहा था कि वह एनसीएलटी के तहत प्रमुख 12 खातों के समाधान से 1 लाख करोड़ रुपये वसूली की उम्मीद कर रही है। एक सरकारी बैंक के प्रमुख ने कहा, 'यह बैंकों के लिए व्यावहारिक होगा कि वे अगले साल तक पीसीए से बाहर आएं। खासकर हम एनसीएलटी के तहत समाधान से बेहतर वसूली की उम्मीद कर रहे हैं।'   सरकारी बैंंक के एक और बैंंकर ने कहा, 'कॉर्पोरेट को दिया जाने वाला कर्ज कम करना और खुदरा उधारी बढ़ाने की रणनीति पर पहले की काम शुरू हो गया है। साथ ही बैंकों में भर्तियां प्रतिबंधित कर दी गई हैं।' 
 
इसके अलावा बैंक यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि उधारी बढऩे के साथ अगले साल तक पूंजी डाली जाएगी। अक्टूबर में सरकार ने दो वित्तीय वर्षों 2017-18 और 2018-19 के दौरान 2,000 अरब रुपये पूंजी डालने की योजना की घोषणा की थी। दिसंबर 2017 तक बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) 8,00,000 करोड़ रुपये से ज्यादा थीं। पीसीए के तहत 11 बैंकों में देना बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया, कॉर्पोरेशन बैंक, आईड़ीबीआई बैंंक, यूको बैंक, बैंक आफ इंडिया, सेंट्रल बैंंक आफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, ओरियंटल बैंक आफ कॉमर्स, बैंक आफ महाराष्ट्र शामिल हैं। पिछले सप्ताह वित्त मंत्रालय ने पीसीए के तहत आने वाले सभी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिससे कि आगे की राह निकाली जा सके और बैंकों की मांग जानी जा सके। 
कीवर्ड bank, loan, debt, RBI,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक