सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए बीत चुका है बुरा समय

श्रीपद ऑटे |  May 27, 2018 11:17 PM IST

देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा 77 अरब रुपये का अपना सबसे बड़ा त्रैमासिक नुकसान दर्ज किए जाने और जनवरी-मार्च 2018 तिमाही के दौरान परिसंपत्ति गुणवत्ता की स्थिति बदतर होने के बावजूद पीएसयू बैंकों का निफ्टी सूचकांक मंगलवार (22 मई) को 2.8 प्रतिशत चढ़ गया था। पीएसयू बैंक सूचकांक में यह तेजी उस दिन आई जब निफ्टी और सेंसेक्स में लगभग 1-1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों के अनुसार पीएसबी द्वारा अब तक जारी किए गए चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजों के उम्मीद की तुलना में कमजोर रहने के बाद भी आय संभावना मजबूत हो रही है और माना जा रहा है कि पीएसबी की परिसंपत्ति गुणवत्ता को लेकर चिंताएं चरम पर पहुंच चुकी हैं। 

चिंताजनक तिमाही

वित्त वर्ष 2018 के आखिरी दो महीनों के दौरान बैंकिंग क्षेत्र में विभिन्न घटनाक्रम को देखते हुए यह माना गया था कि चौथी तिमाही पीएसबी के लिए प्रावधान के संदर्भ में चुनौतीपूर्ण रहेगी। हालांकि पीएसबी की समस्या काफी अधिक गंभीर थी क्योंकि कई बैंकों ने अनुमान से ज्यादा नुकसान दर्ज किया है। अब तक चौथी तिमाही के वित्तीय परिणाम की घोषणा कर चुके 15 पीएसबी में से 13 ने नुकसान दर्ज किया है। अग्रिमों के संदर्भ में प्रमुख दो बैंकों पीएनबी और एसबीआई ने सबसे ज्यादा त्रैमासिक नुकसान दर्ज किया है। उनका संयुक्त रूप से शुद्घ नुकसान चौथी तिमाही में 210 अरब रुपये पर रहा। 

पीएसबी पर आरबीआई द्वारा 12 फरवरी 2018 को गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के लिए घोषित नई रूपरेखा से भी दबाव पड़ा है। इसके अलावा पीएनबी को 134 अरब रुपये की धोखाधड़ी से अतिरिक्त प्रभाव दिखा। नई रूपरेखा में तय समय-सीमा पर समाधान योजनाएं पेश करने में विफल रहने पर बैंकों को एनपीए के तौर पर अपने फंसे कर्ज की पहचान करना अनिवार्य बनाया गया है। इनमें से ज्यादातर को खराब ऋण के तौर पर चिह्निïत किए जाने से पीएसबी को चौथी तिमाही में भारी दबाव का सामना करना पड़ा। उदाहरण के लिए शीर्ष पांच पीएसबी को स्लिपेज के संदर्भ में तिमाही आधार पर 1 से 10 गुना की वृद्घि का सामना करना पड़ा जिससे प्रावधान में तिमाही आधार पर 90 प्रतिशत और सालाना आधार पर 153 प्रतिशत का इजाफा हुआ। 15 पीएसबी का सकल एनपीए तिमाही आधार पर 18.4 प्रतिशत बढ़ा और पांच प्रमुख पीएसबी का सकल एनपीए मार्च 2018 तक उनकी सकल अग्रिमों के 11-18 प्रतिशत पर दर्ज किया गया जबकि दिसंबर 2017 की तिमाही में यह 10-13 प्रतिशत था।

कमजोर परिचालन प्रदर्शन के अलावा पीएसबी को सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) के बाजार मूल्य में कमी पर अनुमानित नुकसान के लिए अतिरिक्त प्रावधान की समस्या से जूझना पड़ा है। यह समस्या लगातार दूसरी तिमाही में बॉन्ड प्रतिफल में तेजी की वजह से गंभीर हुई है। पीएसबी जी-सेक में प्रमुख निवेशक हैं। चूंकि बॉन्ड प्रतिफल में किसी तेजी का मतलब बॉन्ड कीमतों में गिरावट आना है। पीएसबी को बॉन्ड वैल्यू में इस तरह की गिरावट के लिए प्रावधान की जरूरत होती है। हालांकि बैंकों को अपने नुकसान को चार तिमाहियों तक आगे बढ़ाए जाने की आरबीआई द्वारा अनुमति दिए जाने के बावजूद एसबीआई ने अपने निवेश बहीखाते में अपने सभी संभावित नुकसान की जानकारी दी है। इससे चौथी तिमाही में उसका नुकसान बढ़ा और बैंक ने 34 अरब रुपये का ट्रेजरी नुकसान दर्ज किया। 

चुनौतियां होंगी कम

चौथी तिमाही में बड़े पैमाने पर एनपीए की पहचान के साथ विश्लेषकों का मानना है कि ज्यादातर पीएसबी के लिए बुरा समय अब बीत चुका है और आय में चालू वित्त वर्ष में सुधार आना शुरू हो जाएगा। नारनोलिया सिक्योरिटीज में मुख्य निवेश अधिकारी शैलेंद्र कुमार कहते हैं, 'मार्च 2018 तक कई पीएसबी के फंसे कर्ज में भारी कमी आई जिससे जून 2018 की तिमाही में प्रावधान की कुछ समस्या बरकरार रह सकती है (मुख्य रूप से आरबीआई के संशोधित एनपीए नियमों की वजह से)। हालांकि सितंबर तिमाही से प्रावधान में भारी कमी शुरू हो जाएगी जिससे आय में सुधार आएगा, बशर्ते कि प्रतिकूल वृहद कारक बाधक न बनें।' एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार भी मंगलवार को वित्तीय परिणाम की घोषणा के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में यह कह चुके हैं कि परिसंपत्ति गुणवत्ता की समस्या चरम पर पहुंच चुकी है। इसका अंदाजा एसबीआई के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है क्योंकि इस ऋणदाता का देश की कुल अग्रिमों में एक-तिहाई का योगदान है। एसबीआई की फंसी परिसंपत्तियां चौथी तिमाही में घटकर कुल अग्रिमों की 6.7 प्रतिशत रह गईं जो वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही में 8.5 प्रतिशत थीं। विश्लेषकों का मानना है कि सिर्फ जोखिम सहन करने वाले निवेशकों को ही मौजूदा समय में पीएसबी शेयरों पर दांव लगाना चाहिए। 
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