एसबीआई की वर्ष 2020 की योजना भरोसेमंद

अभिजित लेले और श्रीपद ऑटे |  May 27, 2018 11:20 PM IST

ऐसा लगता है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) मार्च, 2018 तिमाही में 77.18 अरब रुपये के घाटे से शांति से निपट रहा है। बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार को आगे बेहतर दिनों की आस है। नतीजों के बाद एक सम्मेलन में सोमवार को कुमार ने कहा, 'बीता वर्ष निराशाजनक रहा, लेकिन वर्तमान वर्ष उम्मीदों भरा है और वित्त वर्ष 2020 खुशी का वर्ष होगा।' उन्हें उम्मीद है कि ऋण उठाव में अच्छी वृद्धि, मजबूत वित्तीय स्थिति और लागत नियंत्रण का फायदा मिलेगा। बैंक के कमजोर वित्तीय नतीजों के बावजूद शेयर बाजार ने इसके आउटलुक को लेकर आशावादी नजरिया अपनाया है। यह शेयर मंगलवार को नतीजों की घोषणा के बाद तीन कारोबारी सत्रों में करीब 10 फीसदी चढ़ चुका है। 

विश्लेषकों के मुताबिक देश के सबसे बड़े बैंक द्वारा वित्त वर्ष 2020 के लिए तय लक्ष्य विश्वनीय और पहुंच के अंदर हैं। फंसे ऋणों की पहचान और उनके लिए प्रावधानों के जरिये बैलेंस शीट को लगभग पूरी तरह साफ-सुथरा बनाया गया है। बैंक के खुदरा ऋण अच्छी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। इनका वित्त वर्ष 2018 में कुल ऋणों में 57 फीसदी हिस्सा था। वहीं एसबीआई कंपनियों को ऋणों में सबसे आगे है,  जिसका उसे आने वाले भविष्य में फायदा मिलेगा। 

कुमार ने कहा कि उनकी मुख्य प्राथमिकता बैंक के ऋण प्रोफाइल को मजबूत बनाना है। एसबीआई मार्च, 2020 तक कुल फंसे ऋणों (एनपीए) का हिस्सा 6 फीसदी से नीचे लाने की दिशा में काम करेगा, जो मार्च, 2018 में 10.91 फीसदी थे। ऋणों की वसूली सुधारने के अलावा फंसे ऋणों के लिए प्रावधानों का स्तर वित्त वर्ष 2020 तक बढ़ाकर 60 फीसदी से अधिक किया जाएगा, जो मार्च, 2018 में 50.38 फीसदी था। इससे एनपीए के स्तर को वित्त वर्ष 2020 में 2.3 फीसदी से नीचे लाने में मदद मिलेगी, जो इस समय 5.73 फीसदी है। 

एडलवाइस सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा कि घटती प्रतिस्पर्धा के बीच एसबीआई उभरते अवसरों को भुनाने में अन्य बैंकों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। इसने कहा, 'वर्तमान समय एसबीआई के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसका पता आस्ति गुणवत्ता जोखिमों के कारण बैंक की आमदनी में अस्थायी गिरावट से चलता है। हालांकि ऐसा लगता है कि वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में जितनी गिरावट आनी थी, वह आ चुकी है और अब इसमें आगे बढ़ोतरी होगी।' एसबीआई को उम्मीद है कि उसका शुद्ध ब्याज मार्जिन मार्च, 2020 तक 3 फीसदी का स्तर पार कर जाएगा, जो वित्त वर्ष 2018 में 2.67 फीसदी था। बैंक को इसमें प्राइसिंग पावर यानी जमा दरें कम और ऋण दरें बढ़ाने की हैसियत और जोखिम-प्रतिफल को बेहतर बनाने से मदद मिलेगी। बैंक मार्जिन सुधारने के लिए ऋण-जमा अनुपात को बढ़ाएगा और एनपीए बनने वाले ऋणों को घटाएगा। बैंक को अप्रैल, 2015 और मार्च, 2018 के बीच फंसे ऋणों की श्रेणी में आने वाले ऋणों पर अपनी कुछ ब्याज आमदनी को वापस करना पड़ा। 

विश्लेषकों ने कहा कि बैंक की फंड की लागत कम थी, जिसका उसे फायदा मिला है। बैंक को लागत कम रखने में अपनी वित्तीय ताकत, बड़े कारोबार और सभी क्षेत्रों के अनुभव से मदद मिली है। उन्होंने कहा कि इससे एसबीआई कुछ ऋणों पर ऊंची ब्याज दरें वसूलने में सफल रहा। 

सरकारी क्षेत्र के कुछ कमजोर बैंकों को ऋण देने में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उन्हें तत्काल उपचारात्मक कार्रवाई (पीसीए) व्यवस्था में रखा है। इससे उनके ऋण देने पर प्रतिबंध लग गया। 

इसके अलावा निजी क्षेत्र के बड़े ऋणदाताओं ने भी अपने हाथ जलाए हैं, इसलिए वे आगे ऋण देने में सतर्कता बरतेंगे। इन सब वजहों से देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई को प्रतिस्पर्धा होने के बावजूद बढ़त मिली है। बेहतर आर्थिक संभावनाओं को देखते हुए एसबीआई को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2020 में उसकी ऋण वृद्धि 12 फीसदी से ऊपर पहुंच जाएगी, जो वित्त वर्ष 2018 में महज 4.9 फीसदी रही है। 

यह बेहतर रेटिंग वाली कंपनियों को ऋण देने पर जोर देगा, जिनके लिए कम प्रावधानों की जरूरत होगी। सकल अग्रिमों मे जोखिम वाली आस्तियों का हिस्सा घटेगा। यह अप्रैल, 2017 की शुरुआत में 78.94 फीसदी था, जो मार्च, 2018 में 780 आधार अंक घटकर 71.17 फीसदी पर आ गया। एसबीआई को उम्मीद है कि ऋणों की बेहतर जांच-पड़ताल और समय पर ऋण समाधान उपायों से ऋण की लागत और फंसे ऋणों के लिए अलग रखी जाने वाली राशि में कमी आएगी। फंसे ऋणों के लिए ज्यादातर प्रावधान वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2018 के बीच किए गए हैं और आगे फंसे ऋणों के लिए प्रावधानों का बोझ काफी कम हो जाएगा। 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा है कि वित्त वर्ष 2018 में एसबीआई का प्रदर्शन यह दिखाता है कि आस्ति गुणवत्ता खराबी उससे कहीं बेहतर रही, जितनी आशंका थी। एक दिवालिया मामला (भूषण स्टील) सुलझने और कुछ अन्य का जल्द ही निपटान होने से एसबीआई सबसे ज्यादा लाभ मिलने वालों में से एक होगा। वित्त वर्ष 2018 में 65.47 अरब रुपये का घाटा उठाने के बाद संपत्तियों पर एसबीआई का प्रतिफल ऋणात्मक स्तर पर आ गया। बैंक को इस साल निवेश पर धनात्मक प्रतिफल मिलने की उम्मीद है। 
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