'हमारी रिकवरी में आगे सुधार होगा'

अभिजित लेले |  May 28, 2018 10:15 PM IST

बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी पीएस जयकुमार से अभिजित लेले की बातचीत के मुख्य अंश:

 आपके बैंक को वित्त वर्ष 2018 में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आगे की राह कैसी रहेगी?
बुनियादी प्रदर्शन काफी दमदार रहा है और हम कई टिकाऊ व्यवस्था कर रहे हैं जिनसे हमें लगातार वृद्धि करने में मदद मिलेगी। हमने परिचालन के स्तर पर कई बुनियादी बदलाव लागू किए हैं। वृद्धि की गुणवत्ता के लिहाज से उसके फायदे अब दिखने लगे हैं। बाजार की गतिविधियों और कुछ उद्योग की प्रकृति चक्रीय होने के कारण तिमाही दर तिमाही थोड़ी अस्थिरता दिख सकती है लेकिन बुनियादी तौर पर परिसंपत्ति एवं देनदारी दोनों मोर्चे पर हमारा प्रदर्शन बेहतर होना चाहिए। यदि वृद्धि 15 फीसदी से कम रही तो हमें निराशा होगी। खुदरा पोर्टफोलियो को संतुलित करने का मतलब यह नहीं है कि हम कॉरपोरेट पोर्टफोलियो को नहीं बढ़ा रहे हैं। कॉरपोरेट ऋण खाते में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के दिवालिया मामलों से भी हमारे लिए कुछ अवसर पैदा होंगे।

आप किन चीजों को लेकर चिंतित हैं? किन क्षेत्रों में आप सुधार देखना चाहते हैं?
हमें तिमाही दर तिमाही लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की जरूरत है। हमें उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। कुछ तिमाहियों में हमने काफी बेहतर प्रदर्शन किया है जबकि कुछ अन्य तिमाहियों के दौरान हमारा प्रदर्शन औसत अथवा सामान्य रहा है। ऐसे में आगे के प्रदर्शन को लेकर हम थोड़ा असहज हो सकते हैं। इसलिए हमें उस ओर काम करने की जरूरत है। 

दबावग्रस्त खातों से वसूली के लिए किए गए कार्य के बारे में आप क्या कहेंगे?
संकटग्रस्त ऋण की वसूली के लिए अपेक्षित क्षमता न होने के कारण हमें अधिक प्रावधान करना पड़ा। उसका एक हिस्सा हमारे नियंत्रण से बिल्कुल बाहर है जिसके लिए एनसीएलटी की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन वास्तविकता यह है कि इन खातों में हमारी हिस्सेदारी मामूली है। हमें प्रमुख लेनदार की भूमिका में दखल नहीं देनी चाहिए बल्कि हमें उनका अनुकरण करना चाहिए। इसलिए दबावग्रस्त परिसंपत्तियां तैयार हुईं लेकिन आरबीआई की नीतिगत पहल से उसमें बदलाव आएगा। इसलिए हम उम्मीद तरे हैं कि अगले साल (2018-19) उसे संतुलित कर लिया जाएगा।

क्या आप कुछ अंतरराष्ट्रीय कारोबार को समेटना चाहते हैं?
कई देशों में बैंकिंग परिचालन के लिए अनुपालन लागत काफी बढ़ गई है। इसलिए हम कुछ देशों से अपना कारोबार समेटना चाहते हैं लेकिन नियामकीय प्रकिया पूरी होने से पहले मैं उसका खुलासा नहीं कर सकता।
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