वेतन पर नहीं बनी बात, बैंकों में होगी हड़ताल

सोमेश झा | नई दिल्ली May 28, 2018 10:22 PM IST

करीब 10 लाख बैंक कर्मचारी बुधवार से दो दिन की हड़ताल करेंगे। सरकार वेतन में कम बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिए जाने से नाराज बैंक यूनियनों को मनाने में विफल रही है। अतिरिक्त मुख्य श्रम आयुक्त (सीएलसी) राजन वर्मा ने यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के बैनर तले बैंक यूनियनों, वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) के तहत बैंक प्रबंधन के साथ बैठक कर हड़ताल टालने की कवायद की। 

ऑल इंडिया बैंक एंप्लायीज एसोसिएशन के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा, 'आयुक्त ने हड़ताल से जुड़े मसलों के समाधान की भरपूर कवायद की, लेकिन कुछ सकारात्मक बदलाव न हो सका। आईबीए के माध्यम से बैंकरों ने कहा कि वेतन में बढ़ोतरी के  प्रस्ताव पर वे फिर से विचार करने को इच्छुक हैं, लेकिन उन्होंंने कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया। ऐसे में हड़ताल ही एक रास्ता है।' 

ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) के महासचिव डीटी फ्रैंको ने कहा कि 30 मई और 31 मई की हड़ताल में करीब 10 लाख बैंक अधिकारियों के हिस्सा लेने की संभावना है। बातचीत के दौरान बैंक यूनियनों ने मुख्य श्रम आयुक्त से कहा कि बैंकरों व यूनियनों के बीच 5 मई को बातचीत में वेतन में 2 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया गया था, जो महंगाई को देखते हुए स्वीकार्य नहीं है। 

बिजनेस स्टैंडर्ड ने उस बैठक का ब्योरा देखा है, जिसके मुताबिक, 'आईबीए के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने वेतन को लेकर कई बार बातचीत की है। बड़े पैमाने पर गैर निष्पादित संपत्तियों या खराब कर्ज को देखते हुए वेतन में सिर्फ 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की पेशकश की गई है। लेकिन साथ में यह भी कहा गया कि उन्होंने अभी बातचीत बंद नहीं की है और आगे वार्ता को तैयार हैं।'

बहरहाल बैंक यूनियनों का तर्क है कि वेतन बढ़ोतरी को खराब कर्ज से नहीं जोडऩा चाहिए क्योंकि बैंक के कर्मचारी कठिन श्रम से बैंकों के कामकाज में योगदान दे रहे है। पिछली बार 2012 में वेतन बढ़ोतरी 1 नवंबर 2012 और 31 अक्टूबर 2017 के बीच के लिए थी, जिसमें बैंक कर्मचारियों का वेतन 15 प्रतिशत बढ़ाया गया था। एआईबीओसी के संयुक्त सचिव रवींद्र गुप्ता ने कहा कि यूनियनें इस बार इससे बेहतर वेतन वृद्धि की उम्मीद कर रही थीं।

9 बैंक यूनियनों के संगठन यूएफबीयू के हड़ताल नोटिस के मुताबिक, 'हाल के वर्षों में कर्मचारियों का काम और कारोबार की मात्रा बढ़ी है। इसके साथ ही गैर बैंकिंग काम काज भी दिया गया है। विभिन्न सरकारी योजनाओं की वजह से कर्मचारियों पर बोझ बढ़ा है।' 

एक और मसला यूनियनों ने उठाया है कि आईबीए का फैसला तृतीय श्रेणी के अधिकारियों तक सीमित है। वहीं बैंक यूनियन स्केल 7 तक के अधिकारियों के वेतन में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, जिनमें जनरल मैनेजर, डिप्टी जनरल मैनेजर, असिस्टेंट जनरल मैनेजर और डिविजनल मैनेजर भी शामिल हैं। मुख्य श्रम आयुक्त ने बैंक प्रबंधन से कहा कि इन अधिकारियों को भी वेतन पर बातचीत में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए, जैसा कि पहले होता रहा है। 
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