भारत में बढ़ी डिजिटल बैंकिंग सेंधमारी

मयंक जैन |  May 29, 2018 10:41 PM IST

देश में वित्तीय सेवाएं लेने वाले ग्राहकों ने डिजिटल बैंकिंग को अत्यंत उत्साह से अपनाया लेकिन बैंकिंग फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा शिकार भी उन्हें ही बनना पड़ा। भुगतान कंपनी एफआईएस द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न देशों के लोगों का सर्वेक्षण किया गया जिसमें यह बात सामने आई कि पिछले साल 18 फीसदी भारतीय ग्राहकों ने डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया जो सर्वे में शामिल अन्य देशों में हुई फर्जीवाड़े की घटना के मुकाबले ज्यादा तादाद थी।

इस तरह की धोखाधड़ी सभी उम्र वर्ग के लोगों के साथ होती है लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक इस फर्जीवाड़े का संबंध विभिन्न उम्र वर्ग द्वारा डिजिटल बैंकिंग के लगातार इस्तेमाल किए जाने से था। उदाहरण के तौर पर ऐसी धोखाधड़ी का शिकार होने वाले लोगों की उम्र 27-37 साल के बीच है। इस आयु वर्ग के लोग डिजिटल बैंकिंग ऐप का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इस आयु वर्ग के प्रत्येक चार लोगों में से एक ने फर्जीवाड़े का मामला दर्ज कराया। तुलनात्मक रूप से जर्मनी में 6 फीसदी ग्राहकों ने जबकि ब्रिटेन में 8 फीसदी ग्राहकों ने बैंकिंग फर्जीवाड़े की शिकायत की। 

रिपोर्ट में कहा गया, 'किसी अन्य देश के मुकाबले भारत में धोखाधड़ी के ज्यादा मामले दर्ज किए गए। ऐसे में देश में डिजिटल बैंकिंग की शुरुआत से पहले फर्जीवाड़े की रोकथाम और बैंक खाते की सुरक्षा प्रमुख प्राथमिकता होनी चाहिए। व्यापक सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने और धोखाधड़ी के मामले को जरूर रोका जाना चाहिए और ग्राहकों की सुरक्षा सबसे अहम है।' 

रिपोर्ट में एक दूसरी समस्या का जिक्र भी किया गया जो बैंक द्वारा ग्राहकों की स्वीकार्यता से जुड़ा है। सर्वे में शामिल करीब 40 फीसदी ग्राहकों ने कहा कि ग्राहक के तौर पर बैंकिंग सेवा प्रदाताओं की स्वीकार्यता और उनकी मान्यता से वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। इसी वजह से ग्राहकों की वफादारी कम होती है। रिपोर्ट में कहा गया, 'डिजिटल बैंकिंग का भारत में विस्तार हो रहा है और बैंक बदलना भी आसान हो गया है ऐसे में अगर बैंक अपने ग्राहकों को प्रोत्साहन देने और पहचान देने की पहल नहीं करते हैं तो ग्राहक उनके प्रति वफादार नहीं रह पाते।' 

हालांकि इस बीच कुछ अच्छी खबर भी आ रही है। देश के बैंकों के साथ ग्राहकों का 58 फीसदी संपर्क अब डिजिटल हो गया है और दिलचस्प बात यह है कि इस डिजिटल दौड़ में पुराने उपभोक्ता युवा ग्राहकों से काफी आगे हैं। मिसाल के तौर पर 53 साल से अधिक उम्र वर्ग के उपयोगकर्ता बैंङ्क्षकग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए अपने लैपटॉप और स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया, 'दिलचस्प है कि बुजुर्ग उपभोक्ता (53 साल या इससे अधिक उम्र के) डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल अक्सर करते हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल बैंकिंग तंत्र बनने की राह पर अग्रसर है।' 

रिपोर्ट जारी किए जाने के मौके पर एफआईएस (भारत) के प्रबंध निदेशक रामास्वामी वेंकटचलम ने कहा कि रिपोर्ट से यह अंदाजा मिला कि डिजिटल तंत्र में कितनी तेजी से सुधार हो रहा है और बैंकों को अपने ग्राहकों को बेहतर तरीके से संतुष्ट करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'भारतीय अर्थव्यवस्था बदलाव के दौर से गुजर रही है और यह खुद को कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था के रूप में ढालने की कोशिश में है। बैंक अपने ग्राहकों की डिजिटल क्षमता बढ़ाने की कोशिश में हैं ताकि व्यापक वित्तीय गतिविधियां सुगमता से संचालित की जा सकें। डिजिटलीकरण के बढऩे के साथ ही बैंकों को अपने ग्राहकों की जरूरतों को रणनीतिक रूप से प्राथमिकता देनी होगी और ग्राहकों की संतुष्टि बढ़ाने की इच्छा की दिखानी होगी।'

रिपोर्ट में इस बात की ओर इशारा किया गया है कि देश में वित्तीय सलाहकार अब तक प्रचलित हैं और सर्वे में शामिल 60 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके एक वित्तीय सलाहकार हैं और अन्य 5 फीसदी लोगों ने बताया कि उनके एक से ज्यादा वित्तीय सलाहकार हैं। सर्वे के मुताबिक वित्तीय सलाहकारों का इस्तेमाल सभी उम्र वर्ग के लोग करते हैं जिनमें युवा भी शामिल हैं। हालांकि 18-26 साल उम्र वर्ग के महज 44 फीसदी लोगों ने ही बताया कि वे एक वित्तीय सलाहकार की सेवाएं लेते हैं।
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