तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई पर बैंकों ने आरबीआई से मांगी रियायत

सोमेश झा और अभिजित लेले | नई दिल्ली/मुंबई May 30, 2018 01:11 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के कगार पर खड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक रियायत के लिए बैंकिंग नियामक से संपर्क कर रहे हैं। इन बैंकों का कहना है कि इसी साल दिसंबर तक उनके ऋण वितरण एवं विस्तार पर प्रतिबंध न लगाया जाए। 

पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) इस संबंध में आरबीआई के समक्ष अपनी प्रस्तुति पहले ही दे चुका है जिसमें उसने अपनी पुनरुद्धार योजना का खुलासा किया है। अब यूनियन बैंक जैसे अन्य सरकारी बैंक भी ऐसा करने की तैयारी कर रहे हैं। पीएनबी ने वित्त वर्ष 2017-18 में सबसे अधिक शुद्ध घाटा दर्ज किया है। यह पहल वित्त मंत्रालय के उन निर्देशों के बाद की जा रही है जिनमें लघु एवं मझोले उद्यमों के नकदी प्रवाह को लेकर चिंता जताई गई है क्योंकि कई बैंक पीसीए के दायरे में हैं।

पीएनबी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी सुनील मेहता के नेतृत्व बैंक के शीर्ष प्रबंध ने सोमवार को आरबीआई के समक्ष अपनी पुनरुद्धार योजना जमा कराई थी। सूत्रों का कहना है कि बैंक ने पीसीए के तहत उपचार प्रक्रिया को इसी साल दिसंबर तक टालने के लिए नियामक से आग्रह किया है।

 हाल में आरबीआई ने एक परिपत्र जारी कर सभी ऋण पुनर्गठन योजनाओं को खत्म कर दिया था। ऐसे में बैंकों को डूबते ऋण के लिए अधिक प्रावधान करने की जरूरत है। डूबते ऋण और प्रावधान में तेजी के कारण वित्त वर्ष 2017-18 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा।

 पिछले सप्ताह के आरंभ में वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के अधिकारियों ने पीसीए के तहत उपचार प्रक्रिया के कगार पर खड़े पंजाब नैशनल बैंक, यूनियन बैंक सहित अन्य बैंकों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात की थी। सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने इन बैंकों की पुनरुद्धार योजनाओं पर चर्चा की। अधिकारियों ने उन्हें गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की आक्रामक बिक्री के जरिये पूंजी आधार बढ़ाने और वसूली के जरिये गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का स्तर घटाने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।

 वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'बैंकों से कहा गया कि वे अपनी पुनरुद्धार योजना के बारे में नियामक को प्रस्तुति दें। वे कम से कम दिसंबर तक पीसीए के तहत उपचार प्रक्रिया शुरू न करने के लिए आरबीआई से आग्रह करेंगे क्योंकि तब तक बैंक एक उचित कार्ययोजना के साथ अपनी वित्तीय स्थिति सुधार लेंगे।'

 बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि सरकार के साथ बातचीत में आरबीआई के समक्ष पुनरुद्धार योजना की प्रस्तुति देने और पीसीए के तहत कार्रवाई को दिसंबर तक टालने के लिए आग्रह जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। फिलहाल 21 में से 11 सरकारी बैंक पीसीए ढांचे के दायरे में हैं। इन बैंकों की कुल बाजार हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी है। इनमें शामिल प्रमुख बैंकों में आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक, कॉरपोरेशन बैंक और इलाहाबाद बैंक शामिल हैं।

 फिलहाल पीसीए के दायरे से बाहर 10 बैंकों में केनरा बैंक, यूनियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े बैंक शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि यदि इन बैंकों को भी पीसीए के दायरे में ले लिया गया तो जाहिर तौर पर निवेश चक्र में ऋण आपूर्ति का संकट पैदा हो जाएगा।

 एडलवाइस सिक्योरिटीज ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि पीएनबी, केनरा बैंक, आन्ध्रा बैंक, यूनियन बैंक और पंजाब एवं सिंध बैंक भी निकट भविष्य में पीसीए के दायरे में आ सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ऐसा हुआ तो पीसीए के दायरे में आने वाले बैंकों की कुल बाजार हिस्सेदारी करीब 36 फीसदी हो जाएगी।

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